भारत के अलग-अलग रेलवे स्टेशंस पर असंख्य यात्रियों का आवागमन रोजाना ही होता रहता है। इस दौरान यात्रियों को एक से बढ़कर एक अनोखी चीजें भी देखने को मिलती हैं। जब आप ट्रेन यात्रा से पहले रेलवे प्लेटफॉर्म पहुंचते हैं तो आपकी नजर एक न एक बार ऊपर लगी घड़ी पर तो पड़ी ही होगी। वैसे तो अब काफी स्टेशनों पर एनालॉग क्लॉक का भी इस्तेमाल होने लगा है मगर, कई रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर आज भी केवल 24 बजने वाली घड़ी ही यूज होती है। इसे इस्तेमाल करने के पीछे रेलवे का एक खास उद्देश्य होता है। दरअसल, प्लेटफॉर्म पर 24 बजने वाली घड़ी यात्रियों को कन्फ्यूजन से बचाने के लिए लगाया जाता है।
रेलवे क्यों नहीं यूज करता 12 ऑवर टाइम फॉर्मेट
गौरतलब है कि, भारतीय रेलवे 24 घंटे ट्रेनों का संचालन कुशल रूप से कराता है। ऐसे में 12 ऑवर टाइम फॉर्मेट रखने की वजह से यात्रियों में काफी कन्फ्यूजन और असमंजस पैदा होने की संभावना होती है। 12 ऑवर टाइम फॉर्मेट यूज करने के लिए रेलवे को अंकों के आगे AM अथवा PM लिखना पड़ता है। इसके साथ ही रेलवे को आवश्यकतानुसार समय के बाद 'दोपहर' 12:00 बजे और रात में 'मध्यरात्रि' भी लिखना पड़ता है। कहीं इतनी सारी डिटेल्स देखकर यात्रियों से चूक न हो जाए...इसीलिए AM अथवा PM वाली तकनीक में केवल अंकों पर ध्यान देने से ट्रेन के छूट जाने का भी डर बना रहता है।
री-शेड्यूलिंग में ट्रेनों की मदद
24 बजने वाली घड़ी इस्तेमाल करने के पीछे एक और कारण ये भी है कि, ये ट्रेनों के संचालन में मानकीकरण लाता है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में ट्रेनों की री-शेड्यूलिंग करने में काफी सहायता मिलती है।
स्टेशन पर 24 बजने वाली घड़ी करने के अन्य फायदे
रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्म्स पर 24 बजने वाली घड़ी यूज करने के कई और फायदे भी हैं। मसलन कॉर्डिनेशन में सहायता, कम्प्यूटराइज्ड सिस्टम और ऑटोमेशन लागू करना। बता दें कि, ट्रेनों का टाइम टेबल, रिजर्वेशन प्रोसेस, टिकटिंग सिस्टम और कई अन्य कार्यों के कुशल संचालन में भी 24 ऑवर टाइम फॉर्मेट मददगार साबित होता है।
यात्रियों को करता है कन्फ्यूज
ऐसा माना जाता है कि, 12 ऑवर टाइम फॉर्मेट यात्रियों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न करने में नंबर-1 है। उदाहरणार्थ- किसी ट्रेन की टाइमिंग 08:00 AM है और रिजर्वेशन टिकट देखकर यात्री को आभास हुआ टिकट ट्रेन तो रात 08:00 बजे की तो है तो ऐसे में ट्रेन मिस होने के पूरे चांस रहते हैं। ऐसे में 24 बजने वाली घड़ी काफी प्रासंगिक बन जाती है क्योंकि इसमें दिन भर में एक ही बार 08:00 बजेगा। अगली बार 20 बजने का अंक आते ही यात्री को संकेत मिलेगा कि, गाड़ी रात बजे की ही है। इस तरह अंक के रिपीट होने पर भी किसी प्रकार के भ्रम की स्थिति होने का सवाल ही नहीं उठता।
गौरतलब है कि, इससे पहले हमने आपको भारत के उस इकलौते रेलवे प्लेटफॉर्म के बारे में बताया था जिसमें 14 फुटबॉल मैदान समा सकते हैं।
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