बेंगलुरु स्थित एक कंपनी के संस्थापक और सीईओ कार्तिक एसजी (कार्तिक शेनॉय) के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने एक्सपर लिखा कि उनकी कंपनी अब उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के किसी भी पुरुष उम्मीदवार को नौकरी पर नहीं रखेगी। यह पोस्ट 22-23 सितंबर 2026 के आसपास वायरल हुआ और सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई।
उद्यमी की पोस्ट हो रही है वायरल
इस पोस्ट को एक्स पर kkarthikkgs नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में कार्तिक ने अपने पोस्ट में कहा, “मुझे इसके लिए खेद है... लेकिन आज लंबी चर्चा और बहस के बाद हमने साफ कर दिया है कि हम उत्तर भारत के इन चार राज्यों से आने वाले किसी भी पुरुष उम्मीदवार को अपनी कंपनी में हायर नहीं करेंगे। 1. उत्तर प्रदेश, 2. राजस्थान, 3. बिहार, 4. मध्य प्रदेश। हमारे पास पहले से एक राजस्थानी महिला कर्मचारी काम कर रही हैं और उन्होंने इस फैसले का 100 प्रतिशत समर्थन किया है।
क्यों लेना पड़ा अजब फैसला
उन्होंने इस फैसले की वजह बताते हुए एक पूर्व कर्मचारी का जिक्र किया। कार्तिक के अनुसार, करीब दो हफ्ते पहले इन चार राज्यों में से एक के एक पुरुष कर्मचारी को निकाल दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस कर्मचारी को दो बार चेतावनी दी गई थी, फिर भी वह महिला कर्मचारियों के साथ अपमानजनक व्यवहार करता रहा और एक महिला पर बदसलूकी करने की कोशिश भी की।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं दो धाराओं में बंटी दिखीं। कुछ यूजर्स ने कार्तिक का समर्थन किया और कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए। वे मानते हैं कि एक घटना के बाद सतर्कता जरूरी है। वहीं, बड़ी संख्या में लोग इस फैसले को भेदभावपूर्ण और क्षेत्रीय पूर्वाग्रह बता रहे हैं।
एक यूजर ने लिखा, “एक कर्मचारी की वजह से पूरे राज्य के पुरुषों को ब्लैकलिस्ट करना गलत है। व्यक्ति को उसकी योग्यता और चरित्र के आधार पर आंकना चाहिए, जन्मस्थान के आधार पर नहीं।”
दूसरे यूजर ने लिखा कि, “आप इस मामले को निजी रख सकते थे। कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल में कोई भी महिलाओं के खिलाफ अत्याचार नहीं करता, मतलब एक भी मामला नहीं। आप अपनी निजी कंपनी की निजी बैठक की छोटी-छोटी बातों को भी निजी रख सकते थे। आपने इंटरनेट पर वाहवाही बटोरने के लिए ऐसा नहीं किया।” इस पर कार्तिक ने लिखा कि, “लोगों को पता चले... राज्य के लोग किस मानसिकता और संस्कृति से आते हैं... महिलाओं और बच्चों के प्रति कोई सम्मान नहीं... मानव जीवन का कोई मूल्य नहीं। अन्य राज्यों में अपराध होते हैं... हम उनसे निपटते हैं, अपराधियों की तरह नहीं जिन्हें छूट मिल जाती है।”
आलोचकों का तर्क है कि एक व्यक्ति के कथित गलत व्यवहार को पूरे राज्य या क्षेत्र पर थोपना अन्यायपूर्ण है। वे कहते हैं कि बेहतर बैकग्राउंड चेक, स्ट्रॉन्ग वर्कप्लेस पॉलिसी और व्यक्तिगत स्क्रीनिंग से समस्या हल हो सकती है, न कि क्षेत्रीय बैन से। कुछ ने इसे “My Company, My Rules” की आड़ में क्षेत्रवाद करार दिया। कार्तिक ने आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि वे अपने फैसले पर कायम रहेंगे और सुरक्षा को प्राथमिकता देंगे।
यह विवाद भारत में नौकरी के बाजार में क्षेत्रीय संवेदनशीलता, वर्क प्लेस सिक्योरिटी सुरक्षा और समान अवसर के मुद्दों को फिर से चर्चा में लाया है।
गौरतलब है कि, इससे पहले एक महिला ने बेंगलुरु में तीन साल तक रहने के फायदे और नुकसान गिनाए थे।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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