एक रिक्रूटर की छोटी-सी सलाह ने सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी है। टिकटॉक पर कैटलिन वेहनिएनेन नाम की रिक्रूटर ने कहा कि Gen-Z उम्मीदवार इंटरव्यू में आइस्ड कॉफी या Iced Latte लेकर आते हैं। उनके मुताबिक यह अनप्रोफेशनल लगता है। वीडियो वायरल होने के बाद दोनों पक्षों में तीखी प्रतिक्रियाएं आईं।
इंस्टाग्राम पर शेयर की गई पोस्ट
इस पोस्ट को इंस्टाग्राम पर @girlboss नामक हैंडल से शेयर किया गया है। कैटलिन के पास 16 साल का अनुभव है। वे ज्यादातर बड़ी कंपनियों के साथ काम करती हैं। उन्होंने वीडियो में कहा, 'मेरे Gen-Z कैंडिडेट्स इंटरव्यू में आइस्ड कॉफी या आइस्ड लैटे लेकर आ रहे हैं। रिक्रूटर के नजरिए से यह लगता है कि इंटरव्यू आपके दिन के कामों की सूची में बस एक स्टॉप है। जैसे आपने टारगेट जाकर खरीदारी की, कैफे से कॉफी ली, अब इंटरव्यू दे रहे हैं और फिर अगले काम पर निकल जाएंगे। यह थोड़ा बहुत कैजुअल लगता है।” उन्होंने सलाह दी कि कॉफी इंटरव्यू से पहले खत्म कर लें या बाद में पीएं। वे बोलीं कि, “इंटरव्यू में कैजुअल अंदाज में आइस्ड कॉफी लेकर मत प्रवेश करें। इससे ऐसा लगता है कि आपने पहले कॉफी खत्म करने का समय ही नहीं निकाला।”
रिक्रूटर के समर्थन में उतरे लोग
रिक्रूटर और समर्थकों का पक्षकई अनुभवी रिक्रूटर और मिलीनियल यूजर्स कैटलिन से सहमत हैं। उनका कहना है कि इंटरव्यू सिर्फ 30 से 45 मिनट का होता है। इसमें हर छोटी चीज इम्प्रेशन बनाती है। हाथ में कॉफी का कप होने से हैंडशेक में दिक्कत हो सकती है, कप गिरने का खतरा रहता है या ध्यान बंट सकता है। एक यूजर ने लिखा, “30 मिनट से एक घंटे के इंटरव्यू में कॉफी लाने की कोई जरूरत नहीं। आप शिकायत कर रहे हैं लेकिन नियम साफ है।”
दूसरे ने कहा, “प्रोफेशनल मिलीनियल हूं। मैं कभी हाथ में ड्रिंक लेकर नहीं आऊंगी। हाथ दरवाजा खोलने, हैंडशेक और नोट्स लेने के लिए चाहिए।”
कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह अनलिखित नियम है- बेस्ट फुट फॉरवर्ड रखना। कैटलिन ने बाद में क्लैरिफाई किया कि कॉफी से कोई खराब कैंडिडेट नहीं बनता, लेकिन इम्प्रेशन मायने रखता है। वे बोलीं कि, “कोई असली में कॉफी की बहस नहीं कर रहा। कैंडिडेट्स सुनते हैं-‘परफेक्ट बनो, इंसान मत बनो।’ एम्प्लॉयर्स सुनते हैं-‘तैयार रहो, इसे सीरियसली लो।’”
Gen-Z क्या बोले
Gen-Z यूजर्स और कुछ रिक्रूटर इस सलाह को पुराना और सख्त बता रहे हैं। उनका तर्क है कि इंटरव्यू दिन का एक हिस्सा है, पूरी जिंदगी नहीं।
एक कमेंट में लिखा गया, “इंटरव्यू मेरे दिन का सिर्फ एक स्टॉप है। यह मेरा पूरा दिन नहीं है।”
दूसरे ने कहा, “अगर आइस्ड कॉफी की वजह से नौकरी नहीं दोगे तो मुझे आपकी कंपनी में काम नहीं करना। पारंपरिक शिष्टाचार थोपना गलत है।”
कई लोग पूछ रहे हैं कि कंपनियां इतनी सख्ती क्यों बरतती हैं जबकि सैलरी अच्छी नहीं देतीं।
एक टेक रिक्रूटर ने कहा कि, “क्या आप इतने फिक्सेटेड हो कि 90 दिन से खाली पड़ी वैकेंसी भूल गए? क्या लोग काम करने के लिए हायर होते हैं या उनके ड्रिंक चॉइस पुलिसिंग के लिए?”
कुछ Gen-Z एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह जनरेशन बॉउंड्रीज, फेयर पे और वर्क-लाइफ बैलेंस की मांग करती है। उनके लिए कॉफी सिर्फ पेय है, असम्मान का प्रतीक नहीं।
इंस्टाग्राम पर दोनों पक्षों से आए फनी कमेंट्स
इंस्टाग्राम पर शेयर की गई पोस्ट में दोनों पक्षों के कई यूजर्स ने मजेदार कमेंट्स भी किए।
एक यूजर ने लिखा कि, 'चलिए इसे ऐसे समझते हैं: मान लीजिए आप इमरजेंसी रूम में हैं और डॉक्टर आपसे बात करने के लिए आते हैं, और साथ ही ठंडी कॉफी की चुस्कियां भी ले रहे हैं। क्या आप सच में कहेंगे कि आपकी पहली प्रतिक्रिया यह नहीं होगी कि वे आपकी बात पर ध्यान नहीं दे रहे हैं और आपकी ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं? सच में?'
दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'लोग इस बात पर बहस भी कर रहे हैं। इंटरव्यू के बाद खुद को एक कॉफी पिला दो प्लीज़।'
तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'तो क्या गर्म कॉफी ठीक रहेगी?'
चौथे यूजर ने लिखा कि, 'अगर इंटरव्यू में टिके रहने के लिए आपको आइस्ड कॉफी की ज़रूरत पड़ती है, तो यह कोई अच्छा संकेत नहीं है। इंटरव्यू देना एक हुनर है, इसलिए मिली प्रतिक्रिया को स्वीकार करें और अपने हुनर को निखारें। कॉफी बाद में पिला देना।'
पांचवें यूजर ने लिखा कि, 'अगर मैं ही रिक्रूटर हूं, तो मेरे लिए भी एक ले आओ, बस काम हो जाएगा।'
छठे यूजर ने लिखा कि, 'मुझे तो लगता है कि गर्म पेय भी ठीक नहीं हैं।'
एक और यूजर ने लिखा कि, 'कृपया घास को छू लें।'
एक अन्य यूजर ने लिखा कि, 'ये तो सरासर बकवास है।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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