रेलवे ट्रैक से ट्रेन की पटरियां चोरी क्यों नहीं होतीं, चुराने से क्यों कांपते हैं चोर-उचक्के; सुनकर यकीन नहीं होगा
Railway Interesting Facts: सोशल मीडिया पर आपने रेलवे से जुड़े कई ऐसे नियम सुने होंगे जिनके जवाब आपको खुद रेलवेकर्मी भी नहीं दे पाते। इस बार एक ऐसा ही फैक्ट हम आपके लिए लेकर आए हैं।

Railway Interesting Facts: अपने जीवन में आप लोगों ने ट्रेन का सफर तो खूब किया होगा। ट्रेन से यात्रा करते समय हर एक यात्री कई चीजों को ऑब्जर्व करता है। ऐसी चीजों को देखकर यात्रियों के मन में कई सवाल आते हैं हालांकि, सफर के दौरान उन दुर्लभ चीजों के महत्व और अस्तित्व में होने का जवाब नहीं मिल पाता है। रेलवे ट्रैक से जुड़ा एक सवाल सोशल मीडिया पर कई बार पूछा जाता है जिसकी वजह से वो वायरल होता रहता है। यूजर्स पूछते हैं कि, खुले में होने के बावजूद रेलवे ट्रैक से ट्रेन की पटरियां चोरी क्यों नहीं होतीं ? आखिर क्यों चोर-उचक्के रेलवे की पटरियों को खरीदने से बचते हैं ? यदि आपके मन में भी कभी ये सवाल आया है तो आज आपको आपके सवाल का जवाब मिल जाएगा।
भारतीय रेलवे की कुछ अनोखी बातें
भारतीय रेलवे कई अनोखी बातों की वजह से काफी चर्चा में रहता है। वहीं, रेलवे ट्रैक सिर्फ लोहे की पटरियां नहीं, बल्कि कई अनोखी बातों का संगम हैं। मसलन, पटरियों के बीच बिछे पत्थर (गिट्टी) पानी निकालने, स्थिरता देने और शोर कम करने के लिए होते हैं, नवापुर स्टेशन भारत के दो राज्यों (महाराष्ट्र और गुजरात) में फैला है, मथुरा जंक्शन से सबसे ज्यादा रूट निकलते हैं और भारत की सबसे धीमी ट्रेन मेट्टुपालयम-ऊटी नीलगिरी पैसेंजर है जो सिर्फ 10 किमी/घंटे की रफ्तार से चलती है।
रेलवे ट्रैक पर गिट्टी क्यों बिछी होती है
रेलवे ट्रैक पर गिट्टी बिछाने का मुख्य कारण ट्रैक को स्थिरता देना, भारी ट्रेन के वजन को समान रूप से बांटना, पानी की निकासी करना, कंपन और शोर कम करना और खरपतवार को उगने से रोकना है, जिससे पटरियां सुरक्षित, सूखी और मजबूत रहती हैं और ट्रेन सुचारु रूप से चल पाती है। नुकीले पत्थर आपस में इंटरलॉक होकर पटरियों को हिलने नहीं देते, जबकि गोल पत्थर फिसल जाते हैं।
पटरियां चोरी क्यों नहीं होती
अब आपको बताते हैं कि, खुले में बिछी होने के बाद भी ट्रेन की पटरियां चोरी क्यों नहीं होतीं ? तो सबसे पहले तो आपको ये बता दें कि, रेलवे की पटरियां स्लीपर्स की मदद से सुरक्षित तरीके से बांधी जाती हैं। इस वजह से इनको खोलना हर किसी के बस की बात नहीं होती है। दूसरी एक और बात ये भी है कि, रेलवे की पटरियां शुद्ध लोहा नहीं होतीं और ये मिश्र धातु से बनाई जाती हैं जिसकी वजह से इनको काटना लगभग असंभव है।
चुराई हुई पटरी खरीदी तो खैर नहीं !
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि, रेलवे ट्रैक से चोरी किया गया लोहा यदि कोई दुकानदार या कबाड़ी खरीदता है तो उसे जेल तक की सजा हो सकती है। ऐसें में अगर चोर ने पटरी चोरी भी कर ली तो उसके सामने इसे बेचने का संकट होगा। यही वजह है कि, रेलवे ट्रैक पर पटरी चुराने से बड़े-बड़े शातिर और चोर-उचक्के भी कांपते हैं ताकि कहीं वे पकड़े न जाएं या उनको जेल में न रहना पड़े।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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