कॉर्पोरेट एम्प्लॉई और कंटेंट क्रिएटर के जीवन में क्या अंतर है, इन महिलाओं ने किया एनालिसिस; बताई हर एक चीज
सोशल मीडिया पर एक वीडियो इन दिनों काफी वायरल हो रहा है। इसमें दो महिलाओं ने कॉर्पोरेट एम्प्लॉई और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के जीवन में अंतर बताए हैं।

बेंगलुरु की दो महिलाओं का एक इंस्टाग्राम रील इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। एक कॉर्पोरेट जॉब करने वाली और दूसरी फुल-टाइम कंटेंट क्रिएटर, दोनों ने अपनी जिंदगी की तुलना की है। बीबीए की पढ़ाई पूरी करने वाली अनन्या (एनालिस्ट) और मानसून (फ्रीलांसर एवं कंटेंट क्रिएटर) का यह वीडियो युवाओं के बीच करियर चॉइस को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @a.nanyaahh._ और @monsoon.dey द्वारा शेयर किया गया है। अपना परिचय देते हुए दोनों ने बताया कि उन्होंने क्राइस्ट यूनिवर्सिटी से BBA की डिग्री हासिल की है। इसके बाद दोनों ने अपने करियर के विभिन्न पहलुओं की तुलना की, जिनमें आय, काम की दिनचर्या, आवागमन, छुट्टियां और अन्य सुविधाएं शामिल हैं। आय के बारे में बात करते हुए अनन्या ने बताया कि उन्हें हर महीने एक ही दिन निश्चित वेतन मिलता है। इसके विपरीत, मानसून ने कहा कि फ्रीलांस कमाई अनिश्चित होती है और भुगतान मिलने से पहले अक्सर "2-3 बार फॉलो-अप और बिल" भेजने पड़ते हैं। वर्क शेड्यूल के बारे में बात करते हुए अनन्या ने अपने दिन को "व्यवस्थित, योजनाबद्ध और सुव्यवस्थित" बताया। वहीं, मॉननसून ने कहा कि वह सुबह उठकर तय करती हैं कि "आज का माहौल और समयसीमा क्या होनी चाहिए।"
ट्रैवलिंग और छुट्टियां
इसके बाद दोनों ने अपने रोजाना के आवागमन की तुलना की। अनन्या ने बताया कि उन्हें बेंगलुरु के ट्रैफिक में एक घंटा लगता है, वहीं मॉनसून ने मज़ाक में कहा कि उनका आवागमन बस बिस्तर से डेस्क तक का है। दोनों ने छुट्टी की नीतियों और लंच ब्रेक की तुलना भी की। अनन्या ने बताया कि उन्हें छुट्टी के लिए पहले से आवेदन करना पड़ता है, जबकि मानसून ने कहा कि उन्हें किसी की अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं है। लंच के बारे में बात करते हुए, एनालिस्ट ने कहा कि वह अपने निर्धारित ब्रेक का इंतजार करती हैं, जबकि क्रिएटर ने स्वीकार किया कि वह अगर मुझे याद आता है तो खाना खाती हैं।
करियर के फायदे और कमियां भी बताईं
अपने करियर की कमियों पर चर्चा करते हुए अनन्या ने कहा कि बैठकों और समय सीमाओं के कारण कॉर्पोरेट जीवन तनावपूर्ण हो सकता है। वहीं, मानसून ने कहा कि कंटेंट क्रिएशन में अकेलापन महसूस हो सकता है, और उन्होंने इसे हर दिन सिर्फ आप और आपका लैपटॉप के तौर पर बताया। वहीं, दोनों ने अपने-अपने करियर के सबसे बड़े फायदों पर भी प्रकाश डाला। अनन्या ने सवैतनिक अवकाश, मुफ्त जिम मेंबरशिप और इंश्योरेंस जैसे लाभों का जिक्र किया। मॉनसून ने कहा कि एक क्रिएटर होने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप कहीं से भी काम कर सकते हैं और बिना अनुमति लिए छुट्टियां ले सकते हैं।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस वीडियो के सामने आने के बाद से यूजर्स ने कॉर्पोरेट नौकरियों और कंटेंट क्रिएशन के बीच संतुलन बनाए रखने के अपने अनुभवों को साझा करना शुरू कर दिया है। एक यूजर ने लिखा, "क्रिएटर होने से जो आजादी मिलती है, वह किसी भी चीज से बढ़कर है।"
दूसरे ने लिखा कि, "एक कंटेंट क्रिएटर होने के नाते, जिसके पास एक फुल-टाइम नौकरी भी है, कंटेंट क्रिएटर का काम उतना ग्लैमरस नहीं है जितना दिखता है। हर महीने पैसे मिलना एक झंझट है। कई महीने ऐसे भी होंगे जब कोई आमदनी नहीं होगी, और उसके बाद का तनाव असहनीय होता है। मुझे हर महीने एक निश्चित समय पर आमदनी होना पसंद है। इससे जो भरोसा मिलता है, वह लाजवाब है।"
तीसरे ने लिखा कि, "दोनों काम करना सबसे अच्छा है। इससे दिमाग के दोनों हिस्से संतुष्ट होते हैं।"
चौथे ने लिखा कि, "पूर्णकालिक वरिष्ठ सॉफ्टवेयर डेवलपर और अंशकालिक निर्माता के रूप में काम करने से आपको दोनों के फायदे और नुकसान मिलते हैं।"
गौरतलब है कि, इससे पहले 50 लाख रुपये की जॉब छोड़कर कंटेंट क्रिएटर बनी महिला का वीडियो वायरल हुआ था।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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