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VIDEO: 'ना डीजे, ना शोर-शराबा...इसे कहते हैं 100% शुद्ध गरबा, यूजर्स बोले- 'Gen-Z को जरूर देखना चाहिए'

Viral Video: बिना डीजे,म्यूजिक और शोर के गरबा करतीं महिलाओं का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसे देखने के बाद यूजर्स ने मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दी हैं।

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Image Source : IG/@ARTISTICLIFEWITHPREETI पारंपरिक गरबा करतीं महिलाएं।

Viral Video: नवरात्र में गरबा नाइट्स और डांडिया नाइट्स जैसे इवेंट्स का चलन बीते कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है। हालांकि, गरबा और डांडिया आज भी परंपरा, संस्कृति और अनुशासन को ध्यान में रखकर किया जाता है। मगर आजकल हो रहे ऐसे इवेंट्स में कुछ हद तक इन तीनों ही चीजों (परंपरा, संस्कृति और अनुशासन) की कमी नजर आती है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर अक्सर बहस भी छिड़ती रहती है। बहरहाल, इन दिनों जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है उसे देखने के बाद आप भी कहेंगे इसे कहते हैं 100% शुद्ध गरबा। इस वीडियो में बिना डीजे,म्यूजिक और शोर के पारंपरिक गरबा नृत्य करती महिलाएं नजर आ रही हैं।  

इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहा वीडियो 

अपनी संस्कृति के दिल को छू लेने वाले प्रदर्शन से सबका दिल जीत रहा है। वायरल हो रहे इस वीडियो में महिलाएं पारंपरिक परिधानों में, बिना किसी माइक्रोफोन या वाद्य यंत्र के, त्योहार के शुद्ध उत्सव में नृत्य करती दिखाई दे रही हैं। वीडियो के कैप्शन में लिखा था, "ना माइक, ना कोई वाद्य यंत्र, पारंपरिक गरबा जिसे आज की पीढ़ी लगभग भूल ही गई है।" वीडियो को @artisticlifewithpreeti नामक हैंडल से शेयर किया गया है। ग्रुप को 'अम्बे मां की जय' के जयघोष के साथ पारंपरिक नृत्य शुरू करते हुए देखा जा सकता है, जिसके बाद वे एक गोलाकार संरचना में बिना किसी ताल को छोड़े, ताल में नृत्य करते हैं।

यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं 

इस वीडियो को अब तक 8.7 लाख से अधिक बार देखा जा चुका था और सैकड़ों टिप्पणियां प्राप्त हुई थीं। इस पर कई लोगों ने मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने महिलाओं के अद्भुत प्रदर्शन की तारीफ की तो कई लोगों ने कहा कि, गरबा को 'पीढ़ी' का मुद्दा बनाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। एक यूजर ने कहा, 'सोसायटी और सड़क पर होने वाले गरबा असली गरबा हैं! बाकी सब व्यावसायिक गरबा हैं, केवल पैसा कमाने के लिए।' जबकि दूसरे ने कहा, 'पूरी तरह से सहमत हूं। असली गरबा शक्ति पूजन से जुड़ा है।' तीसरे ने कहा कि, 'क्या ये महिलाएं उन गीतों को लिखवाकर उन्हें छपवा सकती हैं और अगली पीढ़ी के लिए उपलब्ध करा सकती हैं? याद करने के लिए हमें याद नहीं रहेगा, लेकिन अगर वे दस्तावेज में दर्ज हो जाएँ तो कम से कम हम उन्हें आगे बढ़ा सकते हैं।' 
नोट: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है। 

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