Garbeta Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल की गारबेटा विधानसभा सीट जीतना बीजेपी के लिए काफी मुश्किल होगा। 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव में टीएमसी लगातार तीसरी बार जीत हासिल करना चाहेगी। वहीं, बीजेपी की कोशिश पहली बार यहां अपना परचम फहराने की होगी। गारबेटा की सीट कई बार बदली गई है। मौजूदा सीट 2011 में बनी थी। पहला चुनाव सीपीआईएम ने जीता था। वहीं, बाकी के दो चुनाव टीएमसी ने जीते हैं।
इस सीट पर सीपीआईएम ने भले ही 2011 में जीत हासिल की थी, लेकिन इसके बाद तेजी से अपना जनाधार खोया है और अब यहां पार्टी का वोटबैंक न के बराबर है। वहीं, बीजेपी ने तेजी से लोगों के बीच अपनी पकड़ मजबूत की है। ऐसे में बीजेपी इस बार जीत हासिल करने की कोशिश करेगी।
क्या है गारबेटा का इतिहास
गारबेटा सीट पर पहला चुनाव 2011 में हुआ था। इस चुनाव में सीपीआईएम ने कांग्रेस को हराया था। सुशांत घोष ने हेमा चौबे को 15 हजार वोटों से हराया था। हालांकि, इसके बाद दोनों पार्टियां अपनी जमीन खोती चली गईं। 2016 में टीएमसी ने जीत हासिल की। टीएमसी के आशीष चक्रवर्ती ने सीपीआईएम के सरफराज खान को 61 हजार वोटों के बड़े अंतर से हराया। 2021 में तो विपक्षी पार्टी ही बदल गई। जीत टीएमसी ने हासिल की, लेकिन दूसरे नंबर पर बीजेपी थी। बीजेपी उम्मीदवार 10 हजार वोट से पीछे थे।
क्या हैं समीकरण?
लोकसभा चुनाव के आंकड़े भी यही गवाही देते हैं कि मुकाबला बीजेपी और टीएमसी के बीच होगा, लेकिन टीएमसी का पलड़ा भारी रह सकता है। 2019 लोकसभा चुनाव में यहां बीजेपी को टीएमसी पर 6800 वोट की बढ़त मिली थी। वहीं, 2024 में टीएमसी ने बीजेपी पर 23000 वोट की बढ़त हासिल की। ऐसे में कहा जा सकता है कि टीएमसी के लिए यहां जीत हासिल करने की संभावना ज्यादा है। हालांकि, बीजेपी से कांटे की टक्कर मिलना तय है।
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