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अफ्रीका में इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा का अधिक खतरा, सीरिया में बढ़ रहा जोखिम: रिपोर्ट

इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा का सबसे अधिक खतरा अफ्रीका में है। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने एक नई रिपोर्ट में यह बात कही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस्लामिक स्टेट यूरोप और अमेरिका के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है।

Islamic State- India TV Hindi
Image Source : AP Islamic State

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने एक नई रिपोर्ट में कहा है कि इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा के आतंकियों और उनके सहयोगियों का खतरा अफ़्रीका के कुछ हिस्सों में सबसे अधिक है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सीरिया में भी जोखिम बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बुधवार को वितरित की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम अफ्रीका का अल-कायदा से जुड़ा जमात नस्र अल-इस्लाम वाल-मुस्लिमीन समूह और पूर्वी अफ्रीका का अल-कायदा से जुड़ा अल-शबाब अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र का लगातार विस्तार कर रहे हैं। 

इस वजह से बढ़ रही हैं चिंताएं

जमात नस्र अल-इस्लाम वाल-मुस्लिमीन समूह को जेएनआईएम के नाम से भी जाना जाता है। दोनों समूहों के खिलाफ प्रतिबंधों की निगरानी कर रहे विशेषज्ञों ने कहा कि आंशिक रूप से आतंकवाद-रोधी दबावों के कारण पश्चिम एशिया में इस्लामिक स्टेट को हुए नुकसान के कारण "संगठन का अफ्रीका के कुछ हिस्सों की ओर झुकाव जारी है।’’ उन्होंने कहा, "क्षेत्रीय सुरक्षा को कमजोर करने के इरादे से मध्य एशिया और अफगानिस्तान में लौटने वाले विदेशी आतंकवादी लड़ाकों को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं।" 

यूरोप और अमेरिका के लिए खतरा बना हुआ है IS

विशेषज्ञों ने कहा कि इस्लामिक स्टेट यूरोप और अमेरिका के लिए "सबसे बड़ा खतरा" बना हुआ है। उनके अनुसार, अफगानिस्तान स्थित खुरासान समूह सोशल मीडिया और ‘एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म’ के जरिए लोगों को कट्टरपंथी बनाता है। विशेषज्ञों ने कहा कि अमेरिका में कई कथित आतंकवादी हमलों की साजिशें "काफी हद तक गाजा और इजरायल संघर्ष से प्रेरित" थीं, या आईएस द्वारा कट्टरपंथी बनाए गए लोगों द्वारा इन्हें अंजाम दिया गया था।

ऐसे बना अल-कायदा

1979 में जब सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर हमला किया, तो मुस्लिम दुनिया से कई युवा 'जिहाद' के नाम पर अफगानिस्तान पहुंचे। इन्हीं में से एक था सऊदी अरब का अमीर और कट्टरपंथी विचारधारा वाला ओसामा बिन लादेन। लादेन ने अमेरिकी सहायता से अफगान मुजाहिदीनों के साथ सोवियत सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी। सोवियत संघ की वापसी के बाद, 1988 में ओसामा ने एक वैश्विक "इस्लामी जिहादी नेटवर्क" के रूप में अल-कायदा की स्थापना की। इसका उद्देश्य था – इस्लामी कानूनों को लागू करना और पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका के खिलाफ युद्ध छेड़ना। 

इस्लामिक स्टेट के बारे में जानें

ISIS की जड़ें 2003 में अमेरिका की ओर से इराक पर किए गए हमले के बाद पनपीं। इराक के सद्दाम हुसैन शासन को हटाने के बाद उपजे शून्य और शिया-सुन्नी संघर्ष ने आतंकी संगठनों को बढ़ावा दिया। अल-कायदा की एक शाखा "अल-कायदा इन इराक (AQI)" धीरे-धीरे अलग रास्ते पर चलने लगी। जब 2011 में सीरिया में गृह युद्ध शुरू हुआ, तो इसका फायदा उठाकर अबू बक्र अल-बगदादी ने एक नया संगठन खड़ा किया – इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड लेवेंट (ISIL) या ISIS। (एपी)

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