काबुल: अफगानिस्तान सरकार ने देश के सबसे कुख्यात सरदार गुलबुद्दीन हिकमतयार को माफ कर दिया है। हिकमतयार को उसके पूर्व के गुनाहों के लिए माफी दे दी गई। आइए, आपको बताते हैं कैसे-कैसे गुनाहों में शामिल रहा है यह 'काबुल का कसाई'...
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आतंकी हमलों का था मास्टरमाइंड
हिकमतयार और उसके संगठन हिज्ब-ए-इस्लामी पर आतंकी हमले, युद्ध अपराध जैसे आरोप शामिल थे। अफगानिस्तान सरकार ने हिकमतयार के मिलिटेंट ग्रुप हिज्ब-ए-इस्लामी के साथ हुए शांति समझौते के तहत उसे माफी दी है।
मानवाधिकार उल्लंघन के हैं गंभीर आरोप
हिकमतयार पर मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर अनगिनत गंभीर आरोप हैं। कई महीनों तक चली वार्ता के बाद गुरुवार एक समझौते पर दोनों पक्षों ने दस्तखत किए। इस समझौते से हिकमतयार को अपने सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में वापसी का रास्ता मिल जाएगा।
महिलाओं पर तेजाब फेंकते थे, बुद्धिजीवियों को मार डालते थे हिकमतयार के समर्थक
हिकमतयार पर नागरिकों पर गोले बरसाना, बुद्धिजीवियों का कत्ल, राजनीतिक विरोधियों को गायब करा देना समेत कई गंभीर आरोप हैं। हिकमतयार के समर्थकों पर महिलाओं पर एसिड फेंकने और पाकिस्तान में अंडरग्राउंड यातनागृह चलाने का भी आरोप है।
समझौते के खिलाफ हैं काबुल के युवा
वहीं काबुल के युवा इस समझौते और हिकमतयार को माफी देने के खिलाफ हैं। जैसे ही युवाओं को पता चला कि सरकार ने हिकमतयार को माफी दे दी है, वे सड़कों पर आ गए और हिकमतयार को माफी देने के फैसले का विरोध करने लगे। हलांकि समझौते पर दस्तखत करने के लिए हिकमतयार खुद काबुल नहीं पहुंचा था। वह 1997 के बाद से ही भूमिगत हो गया है।
2013 में की थी आखिरी वारदात
समझौते पर अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हनीफ अटमर और हिज्ब-ए-इस्लामी की ओर से सीनियर मेंबर मोहम्मद अमीन करीम ने दस्तखत किए। 2013 में हिकमतयार के संगठन ने सुसाइड बॉम्बिंग की थी जिसमें 10 अफगान और 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी। इस हमले के बाद से इस संगठन की ओर से कोई आतंकी वारदात नहीं की गई है। माना जा रहा है कि इस संगठन की जमीनी पकड़ अब कमजोर होती जा रही है।
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