ढाका: बांग्लादेश में कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख मोतीउर रहमान निजामी को फांसी दिए जाने की तैयारी चल रही है और उसके परिवार के सदस्य उससे आखिरी बार मुलाकात कर रहे हैं। यहां की सर्वोच्च अदालत ने युद्ध अपराध के मामले में मिली मौत की सजा के खिलाफ दायर निजामी की पुनर्विचार याचिका को कल खारिज कर दिया था।
बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का विरोध किया था
काशिमपुर केंद्रीय कारागार के जेलर नासिरूद्दीन ने पीटीआई को बताया, उसकी पत्नी, दो बेटों और बेटी सहित परिवार के सात सदस्य आज उससे मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि करीबी रिश्तेदारों को निजामी के साथ 40 मिनट रहने की इजाजत दी गई। जमात-ए-इस्लामी ने 1971 के बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का विरोध किया था।
ढाका की केंद्रीय जेल में हो सकती है फांसी
कारागार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 73 साल के निजामी को ढाका केंद्रीय कारागार में मौत की सजा दिए जाने की संभावना है, लेकिन काशिमपुर कारागार में भी तैयारियां चल रही हैं। उन्होंने कहा, मौत की सजा ढाका केंद्रीय कारागार में दिए जाने की संभावना है, लेकिन हमने अधिकारियों से कहा है कि काशिमपुर कारागार में भी विकल्प के तौर पर तैयारियां की जाएं।
बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा के खिलाफ आखिरी अपील को किया था खारिज
कल के अदालती फैसले के बाद जमात प्रमुख को मिली मौत की सजा पर किसी भी समय तामील किया जा सकता है। बांग्लादेश के सर्वोच्च न्यायालय ने देश के मुक्ति संग्राम के दौरान किए युद्ध अपराधों को लेकर निजामी को मिली मौत की सजा के खिलाफ एक आखिरी अपील कल खारिज कर दी।
हत्या और बलात्कार का दोषी है निजामी
निजामी को हत्या, बलात्कार और गुप्त रूप से योजना बनाकर शीर्ष बुद्धिजीवियों की हत्या का दोषी ठहराया गया है। उसे अक्तूबर 2014 में मौत की सजा सुनाई गई थी। वह 1971 में कुख्यात अल बद्र मिलीशिया बल का प्रमुख था। तथाकथित एलीट मिलिशिया बल पर बांग्लादेश की 16 दिसंबर 1971 की जीत से ठीक पहले शीर्ष बंगाली बुद्धिजीवियों का बड़ी तादाद में नरसंहार करने के लिए पाकिस्तान सेना की ओर से अभियान चलाने का आरोप है। निजामी को पश्चिमोत्तर पाबना स्थित अपने गांव में 450 से अधिक लोगौं की हत्या करने का दोषी पाया गया था।
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