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बांग्लादेश युद्ध अपराध को लेकर एक और को मौत की सज़ा, दो को जेल

ढाका: बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने 1971 के मुक्ति संग्राम में पाकिस्तानी सैनिकों का साथ देकर युद्ध अपराध करने के जुर्म में एक व्यक्ति को मृत्युदंड और उसके दो भाइयों को उम्रकैद की सजा

Death sentence- India TV Hindi
Death sentence

ढाका: बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने 1971 के मुक्ति संग्राम में पाकिस्तानी सैनिकों का साथ देकर युद्ध अपराध करने के जुर्म में एक व्यक्ति को मृत्युदंड और उसके दो भाइयों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी-बीडी) ने मुजरिमों के लिए फैसले की घोषणा की। इन तीनों की उम्र 60 साल के आसपास है और उन्हें इसी साल के प्रारंभ में गिरफ्तार किया गया था।

न्यायाधीशों के तीन सदस्यीय आईसीटी बीडी पैनल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनवारूल हक ने घोषणा की, उसे :मुहिबुर रहमान बोरो मिंया को: उसकी मौत होने तक फांसी पर लटका कर रखा जाए। इस फैसले में मुहिबुर के छोटे भाई मुजीबुर रहमान अंगूर मियां और रिश्तेदार अब्दुर रजाक को पाकिस्तानी सैनिकों के साथ मिलकर पूर्वोत्तर हबीबगंज में रजाकार फोर्स गठित करने और लोगों पर कहर ढाने के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनायी गई।

यह फैसला न्यायाधिकरण द्वारा इस मामले की सुनवाई पूरी करने के 21 दिन बाद आया है। इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। दस मई को बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामवादी पार्टी जमात ए इस्लामी के प्रमुख मोतिउर रहमान निजामी को 1971 के मुक्ति संग्राम में मानवता के खिलाफ अपराध के अंतिम शेष शीर्ष अपराधी के रूप में फांसी पर चढ़ाया गया था।

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