उसे आज भी तेजाब डाले जाने की वह घटना याद है जिसने उसके शरीर को जला दिया था और उसके कुछ छींटे उसकी मां और बहन पर भी पड़े थे। मुमताज को कई सर्जरी से गुजरना पड़ा और आज भी छिपकर रहना पड़ रहा है क्योंकि उसे अभी भी हमलावरों की ओर से कथित तौर पर मारने की धमकी मिल रही है।
हालांकि अफगानिस्तान में महिलाओें पर तेजाब फेंकने के आंकड़े अल्प हैं लेकिन ऐसी घटनाएं वहां आम हैं। एक किसान की बेटी मुमताज ने घर से बाहर आना-जाना बंद कर दिया है और मुख्य गांव से भी दूर ही रहती है। कई बार अफगानिस्तान में महिलाओं पर तेजाब सिर्फ इसलिए डाल दिया जाता है कि उन्होंने सिर ढंकने वाले हिजाब को पहनने से मना कर दिया या अनचाहे प्रेमियों को नकार दिया।
घटना के बाद मुमताज पर हमला करने वाला भाग गया लेकिन एक अदालत ने उसके तीन साथियों को दस साल कैद की सजा सुनाई। देश में इस तरह के फैसले कम ही आते हैं जो पीडि़त महिलाओं को न्याय मिलने की लौ को जलाए रखने मैं सहायक हैं।
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