पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ का ये सनसनीख़ेज़ ख़ुलासा कि पूर्व सेना प्रमुख राहील शरीफ ने पाकिस्तान से बाहर निकलने में उनकी मदद की, ने पाकिस्तान के क़ानूनी और सियासी गलियारे में हंगामा मचा दिया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने मुशर्रफ के इस बयान पर चुप्पी साध रखी है कि नवाज़ शरीफ सरकार उनके ख़िलाफ़ लंबित मामलों में अदलातों पर दबाव बना रही थी लेकिन राहिल शरीफ़ ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उन्हें देश छोड़ने में मदद की। हालंकि सरकार ने एक टीवी इंटरव्यूह के दौरान मुशर्ऱफ द्वारा लगाए गए कई आरोपों में से एक का खंडन किया है।
एक तरफ सरकारी अधिकारियों ने जहां मुशर्रफ के बयान पर खेद प्रकट किया है वहीं कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पता चलता है कि उनके (मुशर्ऱफ) और सरकार के बीच कोई सांठगांठ थी।
शरीफ सरकार के मंत्री अब्दुल क़ादिर बलोच ने जिओ न्यूज़ से कहा, "दुर्भाग्य से मुशर्रफ ने इस तरह के आरोप लगाकर सीमा लांघी है। अगर उनके देश छोड़ने में जनरल राहिल की कोी भूमिका थी भी तो भी उन्हें उन्हें इस तरह खुलकर नहीं बोलना चाहिये था।"
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष कामरान मु्र्तुज़ा ने कहा कि जब मुशर्रफ को देश छोड़ने दिया गया था तब लगा था कि कुछ संस्थान उनकी मदद कर रहे हैं। मुझे लगता है कि सरकार को बचाने के लिए उन्हें जाने दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राशिद रिज़वी ने कहा कि मुशर्रफ़ का बयान दर्शाता है कि सरकार, न्यायपालिका और उनके बीच कोई समझौता था।
रिज़वी और मुर्तुज़ा ने सु्परीम कोर्ट से इस मामले में फ़ौरन कार्रवाई करने की मांग की है।
प्रधानमंत्री के विशेष सहायक डॉ. मुसादिक मलिक ने कहा कि मुशर्रफ को ये बयान तब देना चाहिये था जब राहिल शरीफ़ सेनाध्यक्ष थे।
टीवी को दिए इंटरव्यूह में मुशर्रफ़ ने कहा कि उनके और प्रधानमंत्री शरीफ़ के बीच मतभेद 90 के दशक में शुरु हो गए थे। शरीफ़ दो वरिष्ठ सैनिक अधिकारियों को बर्ख़ास्त करवाना चाहते थे जो उन्होंने नही किया।
सरकार ने मुशर्रफ के इसी आरोप का खंडन किया है।
Latest World News