लाहौर: मुंबई आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड हाफिज सईद कश्मीरियों की मदद के नाम पर पाकिस्तानियों ने चंदा मांग रहा है। सईद के संगठन जमात-उद-दावा ने पूरे पाकिस्तान में कैम्प लगाए हैं और कश्मीरियों की मदद करने के नाम पर पाकिस्तानियों से चंदे में पैसे और कुर्बानी के लिए मवेशियों की मांग कर रहा है। हाफिज सईद के इरादे कश्मीर और भारत को लेकर क्या हैं यह किसी से भी नहीं छिपा है और उसका यह कदम निश्चित रूप से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाने वाला है।
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तहरीक-ए-आजादी-ए-कश्मीर या मूवमेंट फॉर कश्मीर्स लिबरेशन (एमकेएल) के बैनरों पर सईद का नाम और तस्वीरे हैं और इस संगठन ने कश्मीर की जनता की मदद के नाम पर चंदा मांगने के लिए लाहौर समेत कई शहरों में कैम्प लगाए हैं। जमात के सहयोगी संगठन फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) ने भी चंदा इकट्ठा करने के लिए देशभर में कैम्प लगाए हैं। उनका कहना है कि आजादी के लिए कश्मीरियों के संघर्ष में मदद के लिए चंदा एकत्रित किया जा रहा है।
एमकेएल के बैनरों और पोस्टरों पर हाफिज सईद की तस्वीरों के साथ मृत और घायल कश्मीरियों की तस्वीरें भी हैं और इनमें जनता से अपील की गयी है कि भारतीय बलों के खिलाफ कश्मीरियों के संघर्ष के लिए चंदा दिया जाए। एक बैनर पर लिखा है, ‘एक परिवार के राशन के लिए 5,000 रुपये और एक घायल के इलाज के लिए 20,000 रुपये चाहिए होंगे।’
जमात ने एमकेएल और एफआईएफ के बैनर तले अगले महीने ईद-उल-अजहा के मौके पर मवेशियों की कुर्बानी देने वाले लोगों के लिए मीट को सीधे कश्मीरियों तक पहुंचाने की भी पेशकश की है। एक बैनर पर एक बैल की कुर्बानी के लिए 63,000 रुपये मांगे गए हैं, वहीं एक बैल की कुर्बानी में हिस्सेदारी के लिए 9,000 रुपये की मांग की गई है। इसी तरह बकरे की कुर्बानी के लिए 16,000 रुपये और ऊंट की कुर्बानी में हिस्सेदारी के लिए 13,000 रुपये का चंदा मांगा गया हे।
इन पोस्टरों में लिखा है कि इस तरह से इकट्ठे किए गए मीट को कश्मीर के साथ-साथ फिलस्तीन, म्यांमार, सीरिया जैसे देशों और पाकिस्तान के थारपरकर और पेशावर में जरूरतमंद परिवारों में बांटा जाएगा। इस बीच लाहौर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी हैदर अशरफ ने कहा कि पुलिस ने जमात और एफआईएफ द्वारा शहर में लगाए गए ऐसे दो शिविरों को हटा दिया है। उन्होंने कहा, पुलिस से शहर में जमात और एफआईएफ के सभी दूसरे चंदा शिविरों को हटाने को कहा गया है क्योंकि दोनों संगठन सरकार की आतंकवादियों की निगरानी सूची में हैं।
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