संयुक्त राष्ट्र: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पर नौकाओं को नष्ट करने का फरमान जारी कर भूमध्य सागर पारकर यूरोप पहुंचने वाले शरणार्थियों के लिए संकट पैदा करने को अनैतिक करार दिया है। भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि भगवंत एस बिश्नोई ने सुरक्षा परिषद के अक्टूबर के एक प्रस्ताव का जिक्र करते हुए सोमवार को कहा, "इससे किसी को भी यही अनुमान मिलता है कि भूमध्य सागर पार करने के लिए अपनी जिंदगी को खतरे में डाल रहे लोग उत्पीड़न या मौत से बचने के लिए नहीं, आर्थिक लाभ के लिए ऐसा कर रहे हैं।"
प्रस्ताव में देशों को अधिकार दिया गया था कि वे लीबिया से यूरोप प्रवासियों की तस्करी के लिए प्रयोग की जाने वाली नौकाओं को कब्जे में करके नष्ट कर सकते हैं। प्रस्ताव में इसे मानव तस्करी के खिलाफ उपाय बताया गया था। इसके लिए परिषद ने शांति के लिए खतरों के मद्देनजर अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बहाल करने के लिए संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र के प्रावधानों को लागू किया था। भूमध्य क्षेत्र और सीरियाई शरणार्थी संकट में प्रवासी त्रासदियों पर एक महासभा चर्चा में बिश्नोई ने कहा, "प्रस्ताव के मुताबिक जिन नौकाओं को वे प्रयोग करते हैं, वे अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा हैं और इसलिए उन्हें जब्त और नष्ट किया जाना चाहिए।"
बिश्नोई ने कहा, "लगता है कि परिषद ने यह फैसला सुनाया है कि लोग तब तक अपना जीवन बचाने के लिए नहीं भाग सकते, जब तक कि वे ऐसे जहाजों का उपयोग नहीं करते जो कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप समुद्री पात्रता के योग्य नहीं हैं।" बिश्नोई ने कहा, "जिंदगियों को बचाना, सुरक्षा देना और मानव गरिमा को कायम रखना सर्वोपरि है। जरूरत खुली सीमाओं को बनाए रखने की है, उन्हें बंद करने की नहीं।"
भूमध्य सागर को सीमा पार करने के लिए दुनिया में सबसे खतरनाक बताते हुए बिश्नोई ने कहा, "हमें यह समझने की भी जरूरत है कि समुद्र में त्रासद मौतें केवल इसलिए होती हैं, क्योंकि सुरक्षित रास्ते नहीं हैं।" बिश्नोई ने कहा, "यह विडंबना ही है कि यह संकट वास्तक में अपनी चूक के कारण, संघर्ष का कोई राजनीतिक समाधान खोजने की खुद की जिम्मेदारी को निभाने में नाकाम रहने के कारण परिषद द्वारा ही पैदा किया गया है। सुधार की जरूरत खुद ही दिखाई दे रही है।"
क्षेत्र में 40 लाख से भी अधिक शरणार्थियों को आश्रय देने वाले देशों की सराहना करते हुए बिश्नोई ने कहा, "उनके योगदान को पैसों में नहीं आंका जा सकता, इसलिए दुखद है कि उनके योगदान को श्रेय नहीं दिया जाएगा।" बिश्नोई ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को क्षेत्र के देशों द्वारा दिखाई गई एकजुटता, आतिथ्य और करुणा के समरूप वैश्विक साझेदारी निभानी चाहिए।"
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