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'हिन्द महासागर' पर चीन ने दी भारत को चेतावनी

बीजिंग: चीन ने कहा है कि सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हिन्द महासागर क्षेत्र में स्थिरता लाने में वह भारत की विशेष भूमिका को स्वीकार करता है, लेकिन इसे भारत का ‘बैकयार्ड’ समझने की धारणा परेशानी

भारतीय मीडिया और चीनी सैन्य विशेषज्ञों के बीच इस बातचीत की कमान चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता तथा सीनियर कर्नल यांग युजान ने संभाली और इसका आयोजन आल चाइना जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा किया गया था। वार्ता का मकसद दोनों देशों के बीच बेहतर आपसी समझ को बढ़ावा देना था, जो घनिष्ठ राजनीतिक, सैन्य और कारोबारी संबंध स्थापित करने में लगे हैं।

हिन्द महासागर में पीएलए की नौसैन्य गतिविधियों का ब्यौरा देते हुए पीएलए नेवी एकेडमिक इंस्टीट्यूट की शोधकर्ता झांग वेई ने कहा कि 1985 से चीनी नौसैन्य पोतों ने हिन्द महासागर क्षेत्र में कई देशों का दौरा किया है, जिनमें भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश और पाकिस्तान शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि और अधिक चीनी पोत हिन्द महासागर को पार कर रहे हैं, क्योंकि यह चीन के लिए कारोबार के मकसद से एक महत्वपूर्ण रास्ता बन गया है।

झांग ने कहा, इसके साथ ही वहां पर चीनी नौसेना की मौजूदगी का मकसद समुद्री डकैतों से समुद्री मार्ग की सुरक्षा करना भी है। पीएलए नौसेना अदन की खाड़ी में छह हजार से अधिक पोतों को सुरक्षा कवर मुहैया कराती है, जिनमें से आधे विदेशी पोत होते है।

उन्होंने कहा, इसलिए मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि चीनी नौसैन्य पोतों की मौजूदगी चीनी सेना का विस्तार है। झांग ने कहा,  चीन सरकार हिन्द महासागर में पीएलए नौसैन्य आवाजाही के मामले को बेहद विवेक के साथ लेकर चल रही है। कई बार हमारी पनडुब्बियां हिन्द महासागर में जाती हैं तो हम राजनयिक तरीके से पड़ोसी देशों को सूचित करते हैं । हमें सेना और सरकार के स्तर पर आपसी विश्वास को बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए।

आपसी यात्राओं और प्रशिक्षण के संचालन से आपसी विश्वास बढ़ता है। भारतीय, अमेरिकी, जापानी और ऑस्ट्रेलियाई नौसेनाओं वाले मालाबार अभ्यास के बारे में प्रवक्ता यांग ने कहा कि अभ्यास क्षेत्र तक सीमित रहना चाहिए और इससे किसी तीसरे पक्ष के हितों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

विवादित दक्षिण चीन सागर में ‘एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन’ की स्थापना के बारे में सीनियर कर्नल और पीएलए वायुसेना कमान के निदेशक यांग युजे ने कहा कि जब इसे वर्ष 2013 में लागू किया गया था तो चीन पूर्वी चीन सागर में एडीआईजेड लागू करने का संदेश सही तरीके से नहीं दे पाया।

उन्होंने कहा कि चीनी एडीआईजेड के बारे में गलतफहमियां अभी भी बनी हुई हैं जबकि 20 से अधिक देशों ने अपने-अपने एडीआईजेड बना रखे हैं।

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