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ईरान के सरकारी टीवी ने कहा, राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ेंगे महमूद अहमदीनेजाद

ईरान के सरकारी टीवी ने बुधवार को खबर दी है कि देश के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद जून में होने वाले इस पद के चुनाव में फिर से किस्मत आज़मा रहे हैं। 

Mahmoud Ahmadinejad, Mahmoud Ahmadinejad Iran, Mahmoud Ahmadinejad Election- India TV Hindi Image Source : AP FILE ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद जून में होने वाले इस पद के चुनाव में फिर से किस्मत आज़मा रहे हैं।

तेहरान: ईरान के सरकारी टीवी ने बुधवार को खबर दी है कि देश के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद जून में होने वाले इस पद के चुनाव में फिर से किस्मत आज़मा रहे हैं। टीवी पर प्रसारित फुटेज में दिख रहा है कि महमूद अहमदीनेजाद अपने समर्थकों के साथ गृह मंत्रालय में स्थित रजिस्ट्रेशन सेंटर की ओर बढ़ रहे हैं जहां उन्होंने राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए अपना रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरा। अहमदीनेजाद ने हाल के वर्षों में अपनी कट्टरपंथी छवि को अधिक मध्यमार्गी उम्मीदवारी में चमकाने की कोशिश की है तथा कुप्रबंधन के लिए सरकार की आलोचना की है।

2017 में लगी थी चुनाव लड़ने पर रोक
बता दें कि 2017 में सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली ख़ामेनेई ने अहमदीनेजाद के ऊपर  राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। हालांकि उन्होंने तब नामांकन दायर कर दिया था। खामेनेई ने कहा है कि वह किसी भी उम्मीदवार का विरोध नहीं करेंगे, फिर भी चुनाव परिषद अहमदीनेजाद की उम्मीदवारी रोक सकती है। अगर राजनीतिक परिदृश्य में उनकी वापसी होती है तो यह कट्टरपंथियों में उन असंतुष्टों के लिए खुशी बात हो सकती है जो पश्चिम, खासकर इजराइल और अमेरिका के खिलाफ कड़ा रुख चाहते हैं। ईरान के मौजूदा राष्ट्रपति हसन रूहानी कार्यकाल की सीमा की वजह से फिर से चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।

कड़े रुख के लिए जाने जाते हैं अहमदीनेजाद
अहमदीनेजाद की बात करें तो वह 3 अगस्त 2005 से 3 अगस्त 2013 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे थे। वह ईरान के छठे राष्ट्रपति थे और उनके बाद वर्तमान राष्ट्रपति हसन रूहानी के हाथों में देश की सत्ता चली गई थी। अहमदीनेजाद को अमेरिका, सऊदी अरब, ब्रिटेन और इजरायल के खिलाफ अपने कड़े रुख के लिए जाना जाता है, और इसके लिए उनकी आलोचना भी होती रही है। 2009 में जब अहमदीनेजाद दोबारा राष्ट्रपति चुने गए तो ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ था और पश्चिमी देशों से भी उन्हें कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी थी।

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