सियोल: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सैनिकों द्वारा कोरियाई महिलाओं को यौन दास बनाए जाने के मामले को लेकर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने सोमवार को माफी मांगी, साथ ही जापान ने इस मुद्दे पर दक्षिण कोरिया के साथ एक समझौता भी किया, जिससे दशकों से दोनों देशों के रिश्तों के बीच जमी बर्फ पिघलने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस मुद्दे पर जापान के विदेश मंत्री फुमोई किशिदा ने अपने दक्षिण कोरियाई समकक्ष युन बयुंग-से के साथ एक बैठक के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन किया, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री आबे के बयान को पढ़ा। इस बयान में उन्होंने मानसिक व शारीरिक तौर पर यातना झेल चुके लोगों से माफी मांगी।
कोरिया हेराल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त बयान में किशिदा ने कहा, "कंफर्ट वूमेन (द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यौन दास बनाई गई महिलाएं) मामला एक ऐसा मामला है, जिसमें सैनिकों ने महिलाओं के सम्मान व गरिमा पर गहरा दाग लगाया है और इस पहलू के मद्देनजर, जापानी सरकार ने इसकी जिम्मेदारी ली है।"
जापान ने औपनिवेशिक युग के दौरान कोरियाई महिलाओं को दास बनाने के मुद्दे को लेकर दुख, पश्चाताप और माफी मांगी है और जीवित पीड़ितों के सहयोग के लिए दक्षिण अफ्रीका द्वारा एक फाउंडेशन की स्थापना के लिए एक अरब येन (83 लाख अमेरिकी डॉलर) राशि का सहयोग प्रदान करने पर सहमति जताई है।
दोनों पक्षों ने कहा कि पीड़ितों के सम्मान व गरिमा को फिर से प्राप्त करने व उनके मनोवैज्ञानिक घावों को भरने के लिए फाउंडेशन की स्थापना की जाएगी। जापान ने 1910-45 तक कोरिया को अपना उपनिवेश बनाकर रखा। जापान ने दावा किया कि द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य करने को लेकर मुद्दे को 1965 के एक समझौते के तहत सुलझा लिया गया था। लेकिन सियोल ने दावा किया कि यह मुद्दा समझौते के वक्त के एजेंडे में नहीं था और साल 1990 में पीड़ितों ने इस मुद्दे को उठाना शुरू किया।
यह भी दावा किया गया कि युद्ध के समय के मानवाधिकारों के मुद्दे को अलग से सुलझाया जाना चाहिए। अब तक दक्षिण कोरिया की 238 पीड़ितों ने सरकार के समक्ष पंजीकरण कराया है। उनमें से केवल 46 पीड़ित अब जिंदा हैं, जिनमें से चार विदेश में रहती हैं। उनकी औसत आयु लगभग 89 वर्ष है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अबे ने अपने बयान में 'दिल से माफी व पश्चाताप' के वाक्यांश को बार-बार दोहराया। बयान में हालांकि, जुर्म के लिए कानूनी जिम्मेदारी का जिक्र नहीं किया गया, जिसकी पीड़ित महिलाओं ने अबे कैबिनेट से मांग की थी।
इस समझौते से दोनों देशों के बीच संबंधों में प्रगति आएगी, क्योंकि मुद्दे के कारण दशकों तक संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसा पहली बार हुआ है, जब जापानी सरकार ने युद्ध अपराध के लिए आधिकारिक तौर पर जिम्मेदारी ली है।
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