तोक्यो: द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान की हार की 71वीं बरसी के मौके पर जापान के प्रधानमंत्री शिजो अबे ने सोमवार को विवादास्पद तोक्यो युद्ध स्मारक पर औपचारिक भेंट भेजी। हालांकि वह खुद स्मारक पर नहीं गए। उनका यह कदम चीन और दक्षिण कोरिया के रूख के प्रति उनकी सहमति प्रतीत होता है। यासुकुनी श्राइन युद्ध में मारे गये अधिकांश जापानियों के साथ-साथ युद्ध के बाद युद्ध अपराधों के दोषी ठहराई गई वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक शख्सियतों को श्रद्धांजलि देता है।
उन देशों द्वारा स्वदेशी शिन्टो धार्मिक श्राइन की दशकों से आलोचना की जाती रही है जो 20 वीं सदी के पहले पचास साल में जापान के उपनिवेशवाद और आक्रमण के शिकार हुये।
दिसंबर 2013 में अपने कार्यकाल के पहले साल अबे वहां गये थे जिस पर बीजिंग और सोल ने रोष व्यक्त किया था और करीबी सहयोगी अमेरिका से कूटनीतिक आलोचना का सामना करना पड़ा था। अमेरिका ने कहा था कि इस कार्रवाई से उसे निराशा हुयी है। अबे और अन्य राष्ट्रवादियों का कहना है कि श्राइन मृत सैनिकों को याद करने का स्थान भर है और उन्होंने इसकी तुलना अमेरिका में आर्लिंगटन नेशनल सीमेटेरी जैसे कब्रिस्तान परिसरों से की।
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