काठमांडू: आंदोलनरत मधेशियों ने नेपाल के स्थानीय निकाय चुनावों में हिस्सा लेने के प्रधानमंत्री प्रचंड के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और फिर से आंदोलन शुरू कर दिया। एक दिन पहले उन्होंने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। मधेशी दलों के गठबंधन के साथ समझौता नहीं होने के बावजूद सरकार ने 14 मई को स्थानीय निकाय चुनाव कराने का निर्णय किया है। मधेशी दलों ने सरकार को अपनी मांगें मानने के लिए सात दिन की समय सीमा दी थी और सरकार पर मांग मानने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए वे इससे बाहर हो गए। इन मांगों में नये संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी देना भी शामिल था।
तराई मधेशी लोकतांत्रिक पार्टी के नेता बृखेश चंद्र लाल ने कहा, प्रधानमंत्री के प्रस्ताव पर हमने लंबी चर्चा की लेकिन उन पर विश्वास करने का हमें कोई आधार नजर नहीं आया क्योंकि पहले भी वह मांगों को पूरा करने में विफल रहे हैं। यूनाईटेड डेमोक्रेटिक मधेशी फ्रंट (UDMS) के नेताओं के साथ बैठक में प्रचंड ने उनसे अपील की थी कि संविधान में संशोधन के बाद वे आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में हिस्सा लें और फिलहाल राज्यों के सीमांकन के मुद्दे को टाल दिया था।
उन्होंने कहा था कि राज्य चुनाव कराने से पहले सरकार एक आयोग का गठन करेगी ताकि प्रांतीय सीमांकन से जुड़े मुद्दों को अंतिम रूप दिया जा सके। कार्यक्रम के मुताबिक यूडीएमएफ के 39 सांसद हैं और वे चुनावी गतिविधियों में सहयोग नहीं करेंगे। मोर्चा 26 मार्च को देश भर में श्रद्धांजलि सभा करेगा जिसमें पिछले हफ्ते कथित पुलिस गोलीबारी में मारे गए पांच मधेशी कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि दी जाएगी।
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