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मालाबार अभ्यास में जापान को शामिल किए जाने पर भड़का चीन

भारत-अमेरिका मालाबार नौसेना अभ्यास में जापान को शामिल करने पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए चीन ने कहा कि उसे आशा है कि तोक्यो मुठभेड़ के लिए नहीं उकसाएगा और क्षेत्र में तनाव को नहीं बढ़ाएगा।

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बीजिंग: भारत-अमेरिका मालाबार नौसेना अभ्यास में जापान को शामिल करने पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए चीन ने कहा कि उसे आशा है कि तोक्यो मुठभेड़ के लिए नहीं उकसाएगा और क्षेत्र में तनाव को नहीं बढ़ाएगा। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग लेई ने मालाबार अभ्यास में जापान को शामिल किए जाने पर एक मीडिया ब्रीफिंग में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, हमारा रूख बिल्कुल साफ है। आशा है कि संबद्ध देश मुठभेड़ के लिए नहीं उकसाएगा और क्षेत्र में तनाव नहीं बढ़ाएगा। जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पिछले हफ्ते भारत यात्रा के दौरान यह घोषणा की गई थी कि जापान मालाबार नौसेना अभ्यास में साझेदार बनेगा, जिससे कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाला यह द्विपक्षीय नौसेना अभ्यास स्थायी आधार पर त्रिपक्षीय हो जाएगा। अपनी ब्रीफिंग में होंग ने आबे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच दक्षिण चीन सागर विवाद और दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु सहयोग को लेकर हुई वार्ता का धीमे स्वर में जिक्र किया।

उन्होंने बताया, चीन दक्षिण चीन सागर :एससीएस: में अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक सभी देशों द्वारा नौवहन की स्वतंत्रता का इस्तेमाल किए जाने का सम्मान करता है। हालांकि, उन्होंने सैन्य प्रतिष्ठानों के साथ कृत्रिम द्वीपों के निर्माण का बचाव किया। उन्होंने मोदी-आबे वार्ता के बाद जारी किए गए एक संयुक्त बयान में जिक्र किए गए एससीएस पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा, प्रवालों में चीन द्वारा निर्माण कार्य और एससीएस के द्वीप चीन की संप्रभुता के तहत हैं। इसका नौवहन की स्वतंत्रता और उपर से गुजरने वाले विमानों पर कोई प्रभाव नहीं है। होंग ने कहा कि उन्हें आशा है कि क्षेत्र के बाहर के देश एससीएस में सुरक्षा एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए क्षेत्र के देशों की कोशिशों का सम्मान करेंगे। दक्षिण चीन सागर में क्षेत्र पर दावे को लेकर विवाद में भूमि और समुद्र दोनों शामिल हैं और इसमें चीन, ब्रूनेई, मलेशिया, फिलीपीन और वियतनाम जैसे देश शामिल हैं। भारत जापान असैन्य परमाणु करार पर हांेग ने कहा, भारत और जापान के बीच असैन्य परमाणु करार के बारे में हमारा हमेशा से परमाणु अप्रसार का सम्मान करने में यकीन रहा है। सभी देशों को अधिकार है कि वे परमाणु उर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग करें और संबद्ध सहयोग करें।

उन्होंने कहा, संबद्ध सहयोग से प्राधिकार और प्रभावकारिता तथा अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार व्यवस्था को कायम रखने में मदद मिलेगी। अमेरिका, जापान और यूरोपीय संघ :ईयू: भारत को 48 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह :एनएसजी: में शामिल करना चाहते हैं जो भारत को परमाणु वाणिज्य के लिए व्यापक पहुंच मुहैया करेगा, वहीं चीन ने हाल के महीनों में संकेत दिया है कि यह एनएसजी में शामिल होने की पाकिस्तान की महत्वाकांक्षा को आगे बढ़ाएगा। चीन 48 सदस्यीय एनएसजी समूह का हिस्सा है। एनएसजी अध्यक्ष राफेल ग्रोस्सी ने इस महीने भारत का दौरा किया था और आमराय बनाने की प्रक्रिया के तहत देश के दाखिले के बारे में शीर्ष भारतीय नेताओं से बात की। वहीं, मालाबार नौसेना अभ्यास में जापान के भाग लेने से चीन पहले भी चिढ़ा है। जापान ने 2007 में आस्ट्रेलिया और अमेरिका के साथ मालाबार अभ्यास में भाग लिया था जिस पर यहां की आधाकारिक मीडिया ने आरोप लगाया था कि यह बीजिंग के खिलाफ एक मोर्चे के रूप में उभर रहा है।

हालांकि भारत और चीन के बीच खासतौर पर सेना से सेना के बीच संबंधों में क्रमिक रूप से सुधार आने के मद्देनजर चीन ने अपनी प्रतिक्रिया को नरम कर लिया। हिंद महासगार में इस साल के मालाबार अभ्यास में जापान की भागीदारी पर नरम प्रतिक्रिया आई है। चीन की सरकार संचालित ग्लोबल टाइम्स ने पिछले हफ्ते अपने एक आलेख में कहा था कि इस अभ्यास का असर क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर पड़ा है। इसने लिखा, भारत द्वारा शुरू किया गया पनडुब्बी रोधी अभ्यास संभवत: चीन को निशाना बना कर किया जा रहा है। आसापास के इलाकों मंे चीन की मौजूदगी से नाराज भारत ने जवाबी उपाय के तहत जापान को अभ्यास मंे आमंत्रित किया है।

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