बीजिंग: चीन के नेशनल म्युजियम ने शनिवार को जर्मन दार्शनिक कार्ल मार्क्स की 200वीं जयंती के अवसर पर एक प्रदर्शनी शुरू की। गौरतलब है कि चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्स की समाजवादी विचारधारा से जुड़ाव जताते हुए उनकी जयंती पूरे उत्साह से मना रही है। चीन पर मार्क्सवाद का गहरा प्रभाव है जहां छात्र स्कूल से ही मार्क्स और लेनिन के सिद्धांतों को पढ़ना शुरू कर देते हैं। अमेरिका के बाद चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
‘द पावर ऑफ ट्रूथ’ शीर्षक वाली प्रदर्शनी में मार्क्स के जीवन, मार्क्सवाद के चीनी संस्करण और मार्क्सवाद की थीम पर आधारित समकालीन कला की प्रदर्शनी की जा रही है। प्रदर्शनी में मार्क्स, एंजल्स, लेनिन की पांडुलिपि, दस्तावेज, किताबें, तस्वीरें और मार्क्सवाद की थीम पर आधारित 70 कलाकृतियां प्रदर्शित की जा रही हैं। प्रदर्शनी का प्रायोजन चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का प्रचार विभाग और विभाग के अंतर्गत एक इतिहास शोध संस्थान एवं चाइना फेडरेशन ऑफ लिटररी एंड आर्ट सर्किल्स कर रहे हैं। सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ की रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शनी 3 महीने तक चलेगी।
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 97 साल से कार्ल मार्क्स के समाजवाद के सिद्धांत के प्रति सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के लगाव को ‘बिल्कुल सही’ ठहराते हुए इसका समर्थन किया और कहा कि इसने चीन को पूरी तरह बदल दिया और देश को ‘एशिया के एक बीमार’ से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में तब्दील कर दिया। शी ने कहा, ‘मार्क्सवाद ने ना केवल दुनिया बल्कि चीन को भी पूरी तरह बदल दिया है।’
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