इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व सैन्य प्रमुख जनरल राहील शरीफ को सउदी के नेतृत्व वाले 41 मुस्लिम देशों के सैन्य गठबंधन का प्रमुख नियुक्त किए जाने के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने अपनी पार्टी के नेताओं से कहा है कि वे शरीफ के खिलाफ कोई भी विवादित बयान न दें। पूर्व सैन्य प्रमुख की इस नियुक्ति का विरोध कई पाकिस्तानी नेताओं, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों ने किया है। इन लोगों ने किसी सेवानिवृत्त जनरल के किसी विदेशी सैन्य गठबंधन से जुड़ने के फैसले पर सवाल उठाया है। प्रधानमंत्री ने पाया कि उनकी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज पार्टी के वरिष्ठ नेता विरोधाभासी बयान दे रहे हैं।
रेडियो पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री शरीफ के हवाले से कहा, नवाज शरीफ ने पीएमएल-एन के नेताओं को जनरल (सेवानिवृत्त) राहील शरीफ के बारे में कोई भी विवादित बयान देने से रोक दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरा देश पूर्व सैन्य प्रमुख की शानदार सेवाओं के लिए उनकी सराहना करता है। शरीफ के निर्देशों से कुछ ही दिन पहले सिंध के गवर्नर मोहम्मद जुबैर ने जनरल राहील शरीफ को एक आम जनरल बताया था और कहा था कि उन्हें इतना बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं किया जाना चाहिए।
जुबैर ने कहा, राहील शरीफ को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। तभी तो जब उन्हें अपने हक का जमीन का टुकड़ा आवंटित किया गया, सब उस पर भी हैरानी जताने लगे। उन्होंने कहा, वह किसी भी अन्य जनरल की तरह आम जनरल हैं और यह उनका अधिकार है वह खुद को मिली जमीन को अधिगृहित करें। उनके साथ उचित व्यवहार करें। उन्हें ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश न करें। इससे उनके लिए ही समस्याएं खड़ी होंगी। जुबैर दरअसल उस खबर का हवाला दे रहे थे जिसमें कहा गया था कि जनरल राहील शरीफ को उनकी सेवाओं के लिए खेती की जमीन दी गई है।
सिंध के गवर्नर ने कहा, सउदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रमुख के तौर पर उनके (राहील के) काम को भी असाधारण चीज के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि एक आम व्यक्ति के तौर पर यह उनका परम अधिकार है। राज्य एवं सीमांत क्षेत्र मंत्री लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) अब्दुल कादिर बलूच ने पिछले माह कहा कि जनरल राहील शरीफ को इस विवादित पद को स्वीकार नहीं करना चाहिए। जनरल राहील शरीफ उक्त गठबंधन की कमान इस माह संभालने वाले हैं। इस गठबंधन को मुस्लिम नाटो कहा जा रहा है।
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