काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने आज कहा कि मधेसियों और अन्य जातीय समूहों द्वारा शुरू किया गया आंदोलन ऐसे वक्त में जरूरी नहीं था, जब देश पिछले साल के विनाशकारी भूकंपों से उबरने में जुटा है।
मधेसियों का नये संविधान के सात प्रांतीय संघीय आदर्श के खिलाफ प्रदर्शन
ओली ने यहां भव्य अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन के मौके पर पीटीआई भाषा से कहा, सरकार मधेसियों और अन्य जातीय समूहों से जुड़े मुद्दे को वार्ता के जरिए हल करने में विश्वास करती है। उन्होंने विध्वसंकारी भूकंपों के बाद देश में पुनर्निर्माण की सरकार की कोशिश का जिक्र करते हुए कहा, मधेसियों और अन्य जातीय समूहों द्वारा शुरू किया गया आंदोलन इस समय में जरूरी नहीं था। ओली ने इस पुनर्निर्माण कार्य में पड़ोसियों समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की भी मांग की। प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान पहले ही उद्घोषित कर दिया गया है और यदि उन्हें कोई शिकायत है तो सरकार उन्हें वार्ता के लिए पहले ही बुला चुकी है। उनका बयान ऐसे समय पर आया है जब मधेसी नये संविधान में उल्लेखित सात प्रांतीय संघीय आदर्श के खिलाफ प्रदर्शन का नया दौर शुरू करने जा रहे हैं।
पहले भी प्रदर्शन कर चुके हैं मधेसी
इस अल्पसंख्यक वर्ग ने संसद में बेहतर प्रतिनिधित्व और इस सांविधिक निकाय के संघीय ढांचे को लेकर छह माह तक हिंसक प्रदर्शन की अगुवाई की, जिसे वापस लेने से पहले 50 लोगों की जान चली गयी थी। इस संविधान का संघीय ढांचा मधेसियों के होमलैंड को बांट देता है। आंदोलनकारी मधेसी फ्रंट ने नेपाल सरकार के वार्ता संबंधी पिछले आह्वान को खारिज करते हुए सत्तारूढ़ गठबंधन से राजनीतिक संकट खत्म करने के लिए वार्ता के वास्ते अनुकूल माहौल बनाने की मांग की थी। फ्रंट ने शिथिल पड़ गए अपने आंदोलन को फिर से सुर्खियों में लाने के लिए प्रदर्शन का पहला चरण शुरू किया जो कल समाप्त हुआ।
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