इस्लामाबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के कई इलाकों में चल रहे आतंकी कैंपों के खिलाफ आम जनता सड़कों पर उतर आई है। बुधवार को बड़ी संख्या में पीओके स्थित गिलगित, नीलम घाटी, कोटली, चिनारी सहित कई स्थानों पर लोगों ने सड़कों पर उतर कर अपने गुस्से का इजहार किया और पाकिस्तान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों ने लश्कर जैसे आतंकी संगठन के ट्रेनिंग कैंपों के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया और लश्कर के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेतावनी भी दी कि इन आतंकी कैंपों और इनमें ट्रेनिंग ले रहे आतंकियों का खात्मा जल्द नहीं किया गया तो आंदोलन और बड़ा होगा और उस आंदोलन की गूंज पूरी दुनिया सुनेगी।
लोगों का कहना है कि आंतकी कैंप चलने से उनकी जिंदगी नर्क हो गयी है। मुजफ्फराबाद, गिलगिट और कोटली में प्रदर्शन कर रहे स्थानीय लोगों ने खुले तौर पर चुनौती देते हुए कहा, 'यदि लश्कर तैयबा के जिहादी कैंपों को यहां से नहीं हटाया गया तो हम उनपर कार्रवाई करने को मजबूर होंगे। पाक हुकूमत के खिलाफ पोओके में यूं तो कई दिनों से विरोध चल रहा है, लेकिन भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद विरोध ने तेजी पकड़ ली है।
खुफिया एजेंसियों के मुताबिक उरी हमले के बाद 16-17 आतंकी कैंपों को लश्ककर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मीद और हिजबुल मुजाहिद्दीन के प्रशिक्षण केंद्रों को अपनी मौजूदा जगह से हटाकर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में शिफ्ट किया गया है। इस काम में पाकिस्तातनी आर्मी व इंटर-सर्विस इंटेलीजेंस की मदद ली गई है। मानसेहरा व मुज्जफफराबाद से चलाए जाने वाले चार आतंकी कैंपों को पाकिस्तांनी आर्मी की मदद से शिफ्ट किया गया है।
आपको बता दें कि पीओके वही जगह है जहां भारत ने वहां के आतंकी कैंपों पर सर्जिकल स्ट्राइक करके कई आतंकी ढेर कर दिए थे, लेकिन पाकिस्तान ने इस सर्जिकल स्ट्राइक को झूठा बताया था। ये भी कहा था कि पीओके में कोई आतंकी कैंप नहीं चल रहे हैं मगर पीओके के लोगों ने ही पाक को सच्चाई का आइना दिखा दिया।
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