इस्लामाबाद: कई दशकों के इंतजार के बाद पाकिस्तान सरकार इस महीने के अंत में संसद के आगामी सत्र में हिंदू विवाह अधिनियम को पेश कर सकती है। यह दावा मीडिया में आई एक खबर में किया गया है। यदि ऐसा होता है तो यह एक ऐतिहासिक बात होगी। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को उत्पीड़न की खबरें अक्सर चर्चा में रहती हैं, और यदि यह बिल पेश होता है तो अल्पसंख्यकों के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।
मानवाधिकार मंत्री कामरान माइकल ने कहा कि इस ऐतिहासिक विधेयक के जरिए हिंदू समुदाय के प्रमुख मुद्दों के हल होने की उम्मीद है। इसमें शादी का रजिस्ट्रेशन, तलाक और जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़े अहम मुद्दे शामिल हैं। माइकल द्वारा विधेयक को संसद के अगले सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक दिन होगा और इसका श्रेय विपक्ष और सत्तारूढ़ पार्टियों दोनों को जाता है।
कामरान माइकल ने कहा कि उन्होंने 9 सितंबर को भी विधेयक पेश करने की कोशिश की थी लेकिन कुछ अल्पसंख्यक सांसद सदन में मौजूद नहीं थे और विषय को अगले सत्र के लिए टाल दिया गया। अब अगला सत्र सितंबर के आखिरी हफ्ते में शुरू होगा तब इस बिल पर आगे बढ़ा जाएगा। पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ पार्टी के अल्पसंख्यक सांसद लाल चंद मालही ने विधेयक की सराहना की और कहा कि उनका मानना है कि सरकार और विपक्षी पार्टियों को ऐसे विधान पर अवश्य जोर देना चाहिए ताकि हाशिए पर मौजूद समुदायों की रक्षा की जा सके।
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