इस्लामाबाद: पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर दस्तखत नहीं करने वाले देशों की परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) की सदस्यता के लिए उनकी उम्मीदवारी के आकलन के नए फार्मूले को भेदभावपूर्ण और बेकार बताते हुए खारिज कर दिया है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, विदेश कार्यालय के प्रवक्ता नफीस जकरिया ने गुरुवार को कहा, ‘यह स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण होगा और NSG के (परमाणु) अप्रसार उद्देश्य को आगे बढ़ाने में कोई योगदान नहीं करेगा।’
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भारत और पाकिस्तान की सदस्यता पर 48 सदस्यीय NSG की सियोल में हुई पूर्ण बैठक के बेनतीजा रहने के बाद एनएसजी सदस्यों के बीच चर्चा के लिए ऑस्ट्रिया में अर्जेटीना के राजदूत राफेल मेरिआनो ग्रोसी को समन्वयक नियुक्त किया गया था। गत महीने वियना में हुई एनएसजी की असाधारण पूर्ण बैठक में भी गतिरोध बना रहा। इस माह राजदूत ग्रोसी ने एनएसजी के सदस्यों के समक्ष एक दो पृष्ठ का संशोधित दस्तावेज पेश किया जिसमें एनपीटी पर दस्तखत नहीं करने वाले भारत और पाकिस्तान के आवेदन पत्रों पर विचार करने के लिए एक नौ सूत्री प्रस्ताव शामिल है। गैर एनपीटी आवेदकों के लिए मसौदा के एक संशोधित संस्करण पर विचार करने के लिए गत सप्ताह वियना में एनएसजी सदस्यों की एक बैठक हुई थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जकरिया ने कहा कि पाकिस्तान गैर एनपीटी देशों की एनएसजी सदस्यता के लिए गैर भेदभाव तरीके से एक गैर भेदभावपूर्ण मानदंड आधारित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर लगातार जोर देता है। उन्होंने कहा, ‘इस तरह के मानदंड आधारित दृष्टिकोण एनएसजी के अप्रसार लक्ष्यों के साथ-साथ दक्षिण एशिया में सामरिक स्थिरता के लक्ष्य को आगे बढ़ाएंगे।’ उन्होंने कहा, ‘यह एनएसजी की साख और अप्रसार व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है कि एनएसजी एक नियम आधारित संस्था के रूप में दिखे न कि एक ऐसे समूह के रूप में जो व्यावसायिक और राजनीतिक हितों के आधार पर संचालित होता है और अपने अप्रसार लक्ष्यों को लेकर महज डींग हांकता है।’
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