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क्वेटा विस्फोट: वकीलों, पत्रकारों ने की सप्ताहभर शोक की घोषणा

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में क्वेटा के एक अस्पताल में सोमावार को हुए हमले के बाद पाकिस्तान बार काउंसिल (पीबीसी) और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने मंगलवार को इस हमले में मारे गए वकीलों, पत्रकारों और

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इस्लामाबाद: पाकिस्तान में क्वेटा के एक अस्पताल में सोमावार को हुए हमले के बाद पाकिस्तान बार काउंसिल (पीबीसी) और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने मंगलवार को इस हमले में मारे गए वकीलों, पत्रकारों और अन्य लोगों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए सप्ताहभर के शोक व तीन दिनों की हड़ताल की घोषणा की। एक आत्मघाती हमलावर ने सोमवार को क्वेटा में एक भीड़भाड़ वाले अस्पताल में खुद को विस्फोट से उड़ा लिया, जिसमें 70 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक घायल हो गए। यह पाकिस्तान में इस साल के सबसे घातक आतंकवादी हमलों में से एक था।

'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, पीबीसी उपाध्यक्ष फरोघ नसीम और कार्यकारी समिति के अध्यक्ष अब्दुल फयाज ने बलूचिस्तान बार एसोसिएशन (बीबीए) के अध्यक्ष बिलाल अनवर कासी की हत्या और उसके बाद क्वेटा के सिविल अस्पताल में हुए आत्मघाती हमले की निंदा की। हमले में जान गंवाने वाले अधिकांश वकील थे। मृतकों में बीबीए के पूर्व अध्यक्ष बाज मोहम्मद कक्कड़ भी शामिल हैं। इस घटना में कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

'डॉन' के मुताबिक, दोनों संघों ने वकील समुदाय से अपील की है मृतकों और घायलों के सम्मान में मंगलवार को देशव्यापी हड़ताल करें। पीसीबी ने एक सप्ताह के शोक की घोषणा की है, जिस दौरान वकील बार कक्षों में विरोधस्वरूप बैठकें करेंगे और बांहों पर काली पट्टियां बांधकर घटना की निंदा करते हुए विरोध जताएंगे। बलूचिस्तान में कानून व्यवस्था बनाए रखने में 'संघीय और प्रांतीय सरकारों की विफलता' की निंदा करते हुए पीबीसी ने इस जघन्य हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की तत्काल गिरफ्तारी और उनके खिलाफ जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की।

'डॉन' के अनुसार, पीबीसी ने संघीय और प्रांतीय सरकारों से इस हमले में मारे गए लोगों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने का अनुरोध किया। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 70 लाख पाकिस्तानी रुपये (66,900 डॉलर) और घायलों को 35 लाख पाकिस्तानी रुपये की सहायता राशि देने का अनुरोध किया। पीड़ितों के परिवारों के साथ एकजुटता जताते हुए एससीबीए के नेता सैयद अली जफर ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के इतिहास में यह पहली बार है जब हड़ताल बुलाई गई है। उन्होंने इसे देश की न्यायिक प्रणाली पर हमला करार दिया।

मालिर बार एसोसिएशन ने भी बम विस्फोट की निंदा करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना दिया। इसके अध्यक्ष एजाज बंगश ने कहा कि वकील अगले दो दिनों तक न्यायालय से दूर रहेंगे। 'डॉन' के अनुसार, यह इस साल 27 मार्च को लाहौर के गुलशन-ए-इकबाल पार्क में हुई बमबारी के बाद इस साल का सबसे भीषण हमला है। गुलशन-ए-इकबाल पार्क में हुए हमले में 75 लोगों की मौत हो गई थी।

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