संयुक्त राष्ट्र: ईरान के विदेश मंत्री का कहना है कि सउदी अरब को एक अहम चयन करते हुए यह तय करना होगा कि वह चरमपंथियों का सहयोग और सांप्रदायिक घृणा का समर्थन करते रहना चाहता है या फिर वह अच्छे पड़ोस और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना चाहता है। जावेद जरीफ ने संयुक्तराष्ट्र के महासचिव बान की-मून को लिखे पत्र में कहा कि ईरान की हमारे पड़ोस में तनाव को बढ़ाने की कोई इच्छा या दिलचस्पी नहीं है। वह यह उम्मीद करता है कि सउदी अरब इसकी :तनाव की: वजह पर गौर करेगा।
पश्चिमी एशिया के इन प्रतिद्वंद्वियों के बीच का यह मौजूदा संकट सउदी अरब द्वारा विपक्ष के एक प्रसिद्ध शिया धर्मगुरू शेख निम्र अल-निम्र को दो जनवरी को मौत की सजा देने के बाद से और भड़क गया है। इसके बाद ईरान में प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने सउदी के दो राजनयिक ठिकानों पर हमला बोला था । इसके कारण सउदी सरकार ने तेहरान के साथ अपने रिश्ते तोड़ लिए थे। जरीफ ने कहा कि जून 2013 में राष्ट्रपति हसन रूहानी के चुनाव के पहले दिन से ही वह खुद और राष्ट्रपति क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने और अस्थिरताकारक चरमपंथी हिंसा से निपटने के लिए वार्ता में शामिल होने की हमारी तत्परता का सार्वजनिक और निजी संकेत सउदी अरब को भेजते रहे हैं।
लेकिन जरीफ ने सउदी पर यह आरोप भी लगाया कि वह आतंकी कृत्यों को अंजाम दे चुके चरमपंथियों को सहयोग या जन्म देकर और यमन में एक औचित्यहीन लड़ाई लड़कर जुलाई में छह वैश्विक शक्तियों के साथ हुए परमाणु संधि को विफल करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सउदी तेल की कीमतों में भारी कमी करके ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के आर्थिक युद्ध में भी शामिल है।
Latest World News