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अफगानिस्तान में 6.2 तीव्रता का भूकंप, भारत-पाक भी हिला

अफगानिस्तान में आधी रात को पाकिस्तान तथा ताजिकिस्तान के साथ लगने वाली देश की सीमा पर 6.2 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया।

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काबुल: उत्तर पूर्वी अफगानिस्तान में आधी रात को पाकिस्तान तथा ताजिकिस्तान के साथ लगने वाली देश की सीमा पर 6.2 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, भूकंप 203.5 किमी की गहराई पर आया। दिल्ली, जम्मू कश्मीर और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में भी झटके महसूस हुए।

USGS ने अपनी वेबसाइट पर बताया कि अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से करीब 280 किमी पूर्वोत्तर में यह भूकंप स्थानीय समयानुसार रात 11 बज कर 44 मिनट पर आया। भूकंप के कारण पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में इमारतें हिलने लगीं।

अक्टूबर में पाकिस्तान और अफगानिस्तान में 7.5 तीव्रता का भूकंप आया था जिससे करीब 400 लोग मारे गए और कई इमारतें धराशायी हो गईं जिसकी वजह से राहत कार्यों में बाधा आई थी।

पाकिस्तान में अक्तूबर में आए भूकंप ने वर्ष 2005 के अक्तूबर में आए 7.6 तीव्रता के भूकंप की याद ताजा कर दीं जिसमें 75,000 से अधिक लोग मारे गए थे और करीब 35 लाख लोग विस्थापित हो गए थे। अफगानिस्तान में खास कर हिंदू कुश पहाड़ी क्षेत्र में अक्सर भूकंप आते हैं। यह क्षेत्र यूरेशियाई और भारतीय टैक्टोनिक प्लेटों के जोड़ के पास है।
नेपाल में अप्रैल में आए शक्तिशाली भूकंप और मई में आए तेज झटके में 8,900 से अधिक लोगों की जान गई थी।

दिल्ली, उत्तर भारत में भी झटके

दिल्ली, जम्मू कश्मीर और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में आज रात मामूली तीव्रता का भूकंप आया जिसका केंद्र अफगानिस्तान के हिंदू कुश क्षेत्र में था। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.5 आंकी गई और यह 186 किमी की गहराई पर आया। भूकंप रात 12 बजकर 44 मिनट पर आया और राष्ट्रीय राजधानी में लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।

कश्मीर के लोगोंने भी भूकंप महसूस किया और सुरक्षा की खातिर अपने घरों से बाहर चले गए। जम्मू कश्मीर में मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि राज्य में भूकंप के कारण कोई जानमाल का नुकसान हुआ है। हम अभी कह नहीं सकते कि क्या इस भूकंप से कोई नुकसान हुआ है। विस्तृत ब्यौरा मिलने पर ही हम कुछ कह पाएंगे।

भूकंप आने के बाद लोग दहशत में आ गए और इमारतें गिरने की आशंका के चलते घरों से बाहर निकल आए। मोबाइल नेटवर्क भी जाम होने लगे क्योंकि लोग अपनों की खैर खबर पूछने लगे। यही हाल सोशल नेटवर्किंग साइटों का हुआ।

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