हांगकांग: बीजेपी के राज्यसभा सदस्य और मोदी के करीबी सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में व्याप्त करंसी संकट के लिए नोटबंदी को जिस तरह से लागू किया गया है उसकी आलोचना की है। ग़ौरतलब है कि नोटबंदी के बाद से देश में अफ़रातफ़री मची हुई है और बैंकों और ATM के बाहर हज़ारों की संख्या में लोग रोज़ाना कतार लगा रहे हैं।
स्वामी ने दिस वीक इन एशिया को दिए इंटरव्यूह में कहा, “मैं नोटबंदी के लिए जिस तरह से तैयारी की गई, उससे चकित हूं। उन्होंने कहा कि काले घन के ख़िलाफ़ मुहिम हमारा चुनावी वादा था। "हम ढाई साल से सत्ता में हैं। वित्त मंत्रालय को पहले दिन से इसके (नोटबंदी) लिए तैयारी करनी चाहिये थी। ये कहना आसान है कि मंत्रालय को इसकी जानकारी नहीं थी लेकिन आकस्मिक योजना नही बनाने के लिए ये कोई तर्क नही है। सिर्फ मोदी को ही इसकी जानकारी थी क्योंकि पार्टी या सरकार में इसका ख़ुलासा करने से ये कारगर नहीं होता। आकस्मिक योजना के तहत सभी के लिए ख़ासकर बुज़ुर्गों के लिए सड़कों पर बूथ बनाने चाहिये थे।”
स्वामी के अनुसार नोटबंदी के मोदी के फ़ैसले का एक पहलू सुरक्षा भी है। “पिछली सरकार ने नोट के लिए काग़ज़ के ठेका लंदन स्थित एक कंपनी को दिया था जो पाकिस्तान को भी नोट के काग़ज़ सप्लाई करती है। इसकी वजह से पाकिस्तान के लिए बिना ख़र्चे के जाली नोट छापकर भारत में आतंक फ़ैलाने के लिए आतंकियों की मदद करना आसान हो गया। भारत ने अभी तक इस कंपनी से अनुबंध ख़त्म नही किया है।"
ये पूछे जाने पर कि सरकार ने अभी तक विदेश में खाता रखने वाले भारतीयों के ख़िलाफ़ कार्रवाई क्यों नहीं की, स्वामी ने कहा: “ये सवाल वित्त् मंत्रालय से पूछा जाना चाहिये, मुझसे नहीं। मुझे नहीं पता कि इस बारे में अभी तक क्यों कुछ नहीं किया गया।”
स्वामी ने हार्वर्ड से अर्थशास्त्र पढ़ा है और वह वाणिज्य मंत्री भी रह चुके हैं। स्वामी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते रहे हैं और यहां वह भारत में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ चल रही कार्रवाई पर भाषण देने आए हैं।
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