डैली मिरर के अनुसार इस सुनवाई की कोई साख नही है क्योंकि सुनवाई का कोई चश्मदीद गवाह था ही नही। सुनवाई के दौरान सिर्फ़ एक सरकारी वकील, एक जज और सैनिक अधिकारी और अभियुक्त ही मौजूद थे।
दरअसल ये चाल थी। उस वक्त इसलिए सज़ा दे दी गई क्योंकि मलाला का मामला पूरी दुनियां में तूल पकड़ चुका था और लोग चाहते थे कि आरोपियों को जल्द से सज़ा हो। लेकिन दुनियां का ध्यान मलाला से जैसे ही हटा आठ आरोपियों को रिहा कर दिया गया।
सवाल ये नहीं है कि रिहा किए गए आरोपी मलाला की हत्या की साज़िश में शामिल थे या नहीं, सवाल ये है कि आखिर जनता से झूठ क्यों बोला गया।
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