बीजिंग: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत और चीन के बीच राज्य और प्रांत स्तर पर सहयोग बढ़ाने से द्विपक्षीय संबंध और प्रगाढ़ होंगे तथा इससे दोनों देशों के आम लोगों के बीच संपर्क भी बढ़ेगा। प्रथम भारत-चीन राज्यस्तरीय एवं प्रांतस्तरीय नेताओं के मंच के उद्घाटन के अवसर पर मोदी ने यहां कहा कि यह मंच दोनों देशों के संबंध प्रगाढ़ करने का एक नया वाहक बनेगा।
मोदी ने कहा कि उनकी इस यात्रा में भारत के राज्य कर्नाटक और चीन के प्रांत सिचुआन के बीच साझेदारी की शुरुआत होगी और औरंगाबाद और दुनहुआंग, चेन्नई और चोंगकियांग तथा हैदराबाद और क्विं गदो के बीच सहयोगी शहर का रिश्ता बनेगा।
मोदी ने कहा, "ये घटनाक्रम स्वागत योग्य हैं। हम अपने संबंधों को राष्ट्रीय राजधानी से बाहर निकालकर राज्य की राजधानी और शहरों के स्तर पर ले जा रहे हैं।"
मोदी ने कहा कि उन्होंने अपने मंत्रियों को दिल्ली से बाहर राज्य की राजधानियों तथा अन्य शहरों में सम्मेलन करने के लिए कहा है, ताकि इससे सहयोगात्मक संघवाद को बढ़ावा मिले।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वह सहयोगात्मक संघवाद के विचार को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं, जिसके तहत विभिन्न राज्य निवेश आकर्षित करने तथा रोजगार को बढ़ावा देने के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करेंगे।
मोदी ने कहा, "पुराने योजना आयोग की जगह नीति आयोग की स्थापना कर हमने देश में पहली बार राज्य सरकारों को इस तरह के संस्थान में औपचारिक जगह दी है।"
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने राज्यों को हस्तांतरित की जाने वाली राशि को बढ़ा दिया है।
मोदी ने कहा, "हमें कोयला ब्लॉकों की नीलामी से भी काफी आय हो रही है और यह राज्यों को जा रहा है।"
मोदी ने कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जब पिछले वर्ष भारत दौरे पर थे, तब उन्होंने अगले पांच सालों में भारत में 20 अरब डॉलर निवेश की बात की थी।
उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ने अगले पांच सालों में 20 अरब डॉलर निवेश की बात की थी। उसके तहत कल (शनिवार) कुछ समझौतों पर बात होगी।"
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