जेरूसलम: गाजा पट्टी में एक फिलिस्तीनी चिकित्सक ने बीमारियों से निजात दिलाने के लिए एक वैकल्पिक रास्ता निकाला है। इस वैकल्पिक रास्ते की मंजिल मधुमक्खियों के डंक से गुजरकर मिलती है। इस तरीके से उन बीमारियों का इलाज किया जाता है, जिन पर 'आम' दवाओं का कोई असर नहीं होता है। समाचारपत्र 'जेरूसलम पोस्ट' में बीते रविवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, समुद्र तट पर स्थित एक शरणार्थी शिविर के एक कमरे में डॉ. रतेब समौर रोजाना करीब उन 250 मरीजों का इलाज करते हैं, जिनके कैंसर के चलते बाल गिर रहे हैं। रतेब कीट विज्ञान व मधुमक्खियों के जानकार हैं।
रतेब (58) ने 2003 में स्वयं को ऐपिथैरेपी की पढ़ाई व इससे जुड़ी बातें जानने की दिशा में समर्पित कर दिया था। ऐपिथैरेपी में शहद, प्रोपोलिस (एक तरह का पौधा) और जहर का उपयोग किया जाता है। उन्होंने इलाज का यह तरीका अपने पिता से सीखा है। उन्होंने बताया कि वह मरीजों के शरीर के कुछ हिस्सों पर मधुमक्खी से डंक लगवाते हैं, जिनका उन्होंने ध्यानपूर्वक अध्ययन किया है। मधुमक्खी डंक मारने के बाद मर जाती है।
रतेब ने कहा, "मधुमक्खी डंक थैरेपी अपने आप में एक असाधारण वैकल्पिक दवा साबित हुई है।" दशकों से इजरायली नाकाबंदी का दंश झेल रही गाजा पट्टी में अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण व दवाओं का अभाव है। गाजा निवासी मौनीरा अल-बाबा ने समाचारपत्र को बताया, "मेरे बेटे को ऑटिज्म है। लोगों ने मुझे मधुमक्खियों के बारे में बताया। मैं उसका डेढ़ साल से मधुमक्खियों से इलाज करवा रहा हूं। उसमें बहुत सुधार हुआ है। ऊपर वाले का शुक्र है।"
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