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दिन रात मजदूरी करके भी 2 रुपए प्रति घंटे कमा पाते हैं ये मासूम

बांग्लादेश में ऐसी तमाम फैक्ट्रियां है जहां पर न्यूनतम मजदूरी भी बच्चों को नसीब नहीं होती है। यहां पर बच्चे 12 घंटे की मेहनत के बाद भी 1.81 रुपए प्रति घंटा वेतन पाते हैं।

Bangladesh- India TV Hindi
Image Source : DAILY MAIL Bangladesh

ढ़ाका: कहते हैं कि तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं, तस्वीरें सच का आईना होती हैं। ये तस्वीरें बांग्लादेश की फैक्ट्रियों की उस गंभीर वास्तविक स्थिति को उजागर करने को काफी हैं जिसमें बचपन पिस रहा है। औपचारिक कारखानों के लिए मानकों में सुधार के इतर बांग्लादेश की तमाम फैक्ट्रियों में हजारों बच्चे घंटों की मेहनत करके कपड़ों में लेबल लगाते हैं। इस सब के बावजूद ये बच्चे 2 रुपए प्रति घंटा भी नहीं कमा पाते।

बांग्लादेश की तमाम फैक्ट्रियां ऐसी है जहां पर स्थानीय और भारतीय बाजारों के लिए कपड़े बनते हैं लेकिन कभी कभी इन्हें कुछ अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के ठेके भी मिल जाते हैं जिससे कंपनियां कभी कभी इस दुविधा में भी पड़ जाती हैं कि आखिर इतने सारे कपड़े आ कहां से रह हैं। एक निजी अंग्रेजी दैनिक में छपी खबर के मुताबिक जब फोटोग्राफर क्लाउडिया मोंटेंसो कैसिलस ने इन फैक्ट्रियों  का पर्दाफाश किया। इन फैक्ट्रियों में सुरक्षा के अपर्याप्त इंतजाम के साथ-साथ काम करने के घंटो को लेकर भी काफी गभीर स्थिति देखी। पुराने ढाका कि इन फैक्ट्रियों का जायजा लिया जहां की स्थिति काफी दयनीय थी। एक छोटा सा कारखाना एक एक कमरे के भीतर बना होता है, जिसमें करीब 15 सिलाई मशीन होती हैं। गंभीर स्थिति यह है कि इन कारखानों में न तो कोई इमरजेंसी गेट होता है और न ही आग लगने के बाद उस पर काबू पाने की कोई बुनियादी सुविधा। यहां पर काम करने वाले बच्चों के पास स्कूल जाने का वक्त नहीं है। वहीं बांग्लादेश का दावा है कि उनकी 80 फीसदी फैक्ट्रियां मानकों के आधार पर सुरक्षित हैं।

Image Source : Daily MailBangladesh
      

बच्चे दिन रात करते हैं मेहनत-
बच्चों को कढ़ाई, रगांई, मशीन की सफाई जैसे काम करने होते हैं। कैसिलस ने बताया कि फैक्ट्री के भीतर मजदूरों को सुबह 6 से शाम के 6 बजे तक काम करना पड़ता है, हालांकि हफ्ते के एक दिन इनसे सिर्फ आधा दिन काम लिया जाता है। इतना काम करने के बाद ही ये अपनी न्यूनतम मजदूरी जुटा पाते हैं। फैक्ट्री में काम करने वाले लोग या तो फैक्ट्री के भीतर सोते हैं या फिर वो फैक्ट्री के सामने वाले कुछ कमरों में रहते हैं। इन फैक्ट्रियों में काम करने वाले बच्चों की उम्र 10 से 14 साल के बीच की होती है। यूनीसेफ के मुताबिक बांग्लादेश में बच्चों को बाल मजदूरी करवाई जा रही है।

जीतोड़ मेहनत के बाद क्या पाते हैं बच्चे-
बच्चे और वयस्क कर्मचारियों को 6.50 पाउंड प्रति माह जो कि 800 बांग्लादेशी टका से भी कम होता है। यानी भारतीय रुपए के हिसाब से प्रति दिन की कीमत 20 रुपए है। 12 घंटे की मेहनत के हिसाब से बच्चों को 652.76 रुपए प्रतिमाह मिलते हैं। यानी अगर 12 घंटे की मेहनत को जोड़ा जाए तो कमाई 1.81 पैसे प्रति घंटे बैठती है। अगर बच्चे अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं तो भी उनको अधिकतम 16 पाउंड यानी 1950 टका मिलते हैं। वहीं अगर बांग्लादेश में न्यूनतम मजदूरी की बात की जाए तो यह सरकारी मानकों के हिसाब से यह 41.80 डॉलर यानी 5,300 टका प्रति माह है।

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