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इस तरीके से मिल सकता है भूकंप के संभावित खतरे का संकेत

तोक्यो: शोधार्थियों ने पृथ्वी की अंदरूनी चट्टानी सतहों में तनाव और हीलियम गैस के स्तर के बीच संबंध खोजते हुए दावा किया है कि भूजल में हीलियम के स्तर से भूकंप के संभावित खतरे का

this method may indicate the potential risk of earthquakes- India TV Hindi
this method may indicate the potential risk of earthquakes

तोक्यो: शोधार्थियों ने पृथ्वी की अंदरूनी चट्टानी सतहों में तनाव और हीलियम गैस के स्तर के बीच संबंध खोजते हुए दावा किया है कि भूजल में हीलियम के स्तर से भूकंप के संभावित खतरे का संकेत मिल सकता है। जापान स्थित तोक्यो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने उम्मीद जाहिर की है कि यह खोज ऐसी निगरानी प्रणाली के विकास में सहायक होगी जो बड़े भूकंप आने से पहले तनाव में होने वाले बदलावों का पता लगा सकती है।

जापान के कोबे में साल 1995 में आए बड़े भूकंप सहित अन्य भूकंप का अध्ययन करने पर संकेत मिला है कि भूकंप आने से पहले भूजल की रासायनिक संरचना में शायद बदलाव हो जाता है। अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि जब तनाव पृथ्वी की अंदरूनी सतह में अधिक होता है तब हीलियम का आइसोटोप हीलियम 4 बहुतायत में भूजल में पहुंचता है। वर्ष 2016 में जापान के दक्षिण पश्चिम स्थित कुमामोतो में आए 7.3 तीव्रता के भूकंप के केंद्र के आसपास भी हीलियम 4 की बहुलता पाई गई थी। इस भूकंप के कारण 50 लोग मारे गए थे और गंभीर नुकसान भी हुआ था।

अपने अध्ययन में शोधकर्ताओं ने अप्रैल 2016 में आए भूकंप के 11 दिन बाद इसके केंद्र के आसपास फाल्ट जोन में सात जगहों पर 280 मीटर से लेकर 1,300 मीटर की गहराई से भूजल के नमूने लेने की खातिर एक सबमर्सिबल पंप का उपयोग किया। उन्होंने इन नमूनों के रसायनिक विश्लेषणों के जरिये हीलियम 4 के स्तर में परिवर्तन की तुलना वर्ष 2010 में किए गए विश्लेषणों से की। शोध के प्रमुख लेखक यूजी सानो ने बताया सावधानीपूर्वक विश्लेषण करने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि हीलियम 4 का स्तर उन नमूनों में अधिक था जो हमने भूकंप के केंद्र के आसपास से एकत्र किए थे। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि भूकंप की वजह से चट्टनों में दरारेें आईं और गैस निकली थी। यूजी यूनिवर्सिटी ऑफ तोक्यो में प्रोफेसर हैं।

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