जिनीवा: संयुक्त अरब अमीरात के मानवाधिकार कार्यकर्ता अहमद मंसूर को मानवाधिकारों के लिए नोबेल पुरस्कार कहे जाने वाले मार्टिन एन्नेल्स पुरस्कार के लिए चुना गया है।
अपना देश नहीं छोड़ सकते मंसूर
मंसूर को अपना देश छोड़ने की मनाही है। वह संयुक्त अरब अमीरात में अभिव्यक्ति की आजादी तथा और अधिक राजनीतिक एवं नागरिक अधिकार दिए जाने के लिए 2006 से मुहिम चला रहे हैं। उन्होंने देश में व्याप्त सामाजिक समस्याओं को उजागर करने के कारण जेल में बंद दो ब्लॉगरों की स्वतंत्रता के लिए सफल कोशिश भी की।
खतरे के बावजूद मानवाधिकारों की रक्षा करने वालों को मिलता है पुरस्कार
उन्हें मार्टिन एन्नेल्स पुरस्कार से कल नवाजा गया। इस पुरस्कार का नाम एमनेस्टी इंटरनेशनल के पूर्व महासचिव के नाम पर रखा गया है। यह पुरस्कार मानवाधिकारों की रक्षा करने वाले उस व्यक्ति को दिया जाता है जो बड़े निजी जोखिम के बावजूद मानवाधिकारों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता जताता है।
UAE में मानवाधिकारों की आवाज़ हैं मंसूर
मार्टिन एन्नेल्स फाउंडेशन ने अपनी वेबसाइट पर कहा, अहमद मंसूर संयुक्त अरब अमीरात में उन कुछ आवाजों में से एक हैं जो देश में मानवाधिकार मुहैया कराने की दिशा में हो रहे विकास का विश्वसनीय स्वतंत्र मूल्यांकन मुहैया कराती हैं।
सरकार विरोधी प्रदर्शनों के आरोप में मंसूर को हुई थी तीन साल की सजा
मंसूर को चुनाव बहिष्कार की अपील करने, सरकार विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े होने और यूएई के नेताओं का अपमान करने के लिए इंटरनेट का प्रयोग करने के मामले में 2011 में तीन साल कारावास की सजा सुनाई गई थी। उनके खिलाफ इस मामले में सुनवाई की प्रक्रिया को मानवाधिकार समूहों ने पूरी तरह अनुचित ठहराया था। इस मामले में मंसूर के साथ चार अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था।
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