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म्यांमार के विद्रोहियों और सेना में हुआ संघर्ष विराम, भारत ने हिंसा को पहलगाम से जोड़ने पर की UN की कड़ी निंदा

म्यांमार की सेना और विद्रोहियों को बीच आखिरकार चीन की मध्यस्थता में संघर्ष विराम हो गया है। वहीं भारत ने संयुक्त राष्ट्र की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने आरोप म्यांमार के विस्थापितों को पहलगाम हमले से प्रभावित होने का निराधार आरोप लगाया था।

म्यांमार की सेना और विद्रोहियों में संघर्ष विराम।- India TV Hindi
Image Source : AP म्यांमार की सेना और विद्रोहियों में संघर्ष विराम।

बैंकॉकः म्यांमार के प्रमुख विद्रोही समूह और सेना के बीच चीन की मध्यस्थता से बुधवार को संघर्ष विराम हो गया है। विद्रोही समूह ने कहाकि उसने चीन की मध्यस्थता वाली वार्ता के बाद सेना के साथ संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस कदम से चीन की सीमा के निकट देश के उत्तर-पूर्व में महीनों से जारी भीषण झड़पों में कमी आने की उम्मीद की जा रही है। उधर भारत ने म्यांमार के विस्थापितों को पहलगाम हमले के एसर से जोड़ने पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट की सख्त निंदा की है। 


म्यांमार में क्या हैं चीन के हित

‘तांग नेशनल लिबरेशन आर्मी’ (टीएनएलए) के साथ संघर्ष विराम म्यांमार की सैन्य सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है, जिसने 28 दिसंबर को होने वाले चुनाव से पहले विभिन्न क्षेत्रों पर पुनः नियंत्रण स्थापित कर लिया है। टीएनएलए ने बुधवार को ‘टेलीग्राम’ पर एक बयान में कहा कि म्यांमार की सीमा से लगभग 400 किलोमीटर दूर चीनी शहर कुनमिंग में सोमवार और मंगलवार को चीन की मध्यस्थता में हुई वार्ता के दौरान संघर्ष विराम संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। म्यांमार में संघर्ष विराम कराने के पीछे चीन के कई बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक हित हैं। चीन अपनी सीमाओं पर अस्थिरता को लेकर बेहद चिंतित है। चीन म्यांमार की सेना का सबसे महत्वपूर्ण विदेशी सहयोगी भी है। क्यों चीन के सहयोग से ही फरवरी 2021 में आंग सान सू ची की निर्वाचित सरकार को हटा दी गई थी। इसके बाद म्यांमार की सेना ने सत्ता संभाली थी। इस सत्ता हस्तांतरण के कारण देशव्यापी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुए जो गृहयुद्ध में बदल गया। 

 

भारत ने यूएन के दावे को किया खारिज

भारत ने म्यांमार की मानवाधिकार स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की उस रिपोर्ट की कड़ी निंदा की है, जिसमें उसने भारत के खिलाफ “पक्षपातपूर्ण विश्लेषण” किया है। भारत ने कहा कि यूएन का यह दावा “बिल्कुल भी तथ्यात्मक नहीं” नहीं है कि पहलगाम आतंकवादी हमले से म्यांमार से विस्थापित लोग प्रभावित हुए हैं। भारत ने म्यांमार में हिंसा को तत्काल समाप्त करने का अपना आह्वान भी दोहराया और इस बात पर बल दिया कि स्थायी शांति केवल समावेशी राजनीतिक वार्ता और विश्वसनीय एवं सहभागी चुनावों के माध्यम से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की शीघ्र बहाली से ही सुनिश्चित की जा सकती है। 

 

यूएन की टिप्पणी को भारत ने बताया निराधार

संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में मंगलवार को म्यांमार में मानवाधिकार की स्थिति पर संवाद के दौरान भारत की ओर से लोकसभा सदस्य दिलीप सैकिया ने म्यांमार की मानवाधिकार स्थिति पर उसकी रिपोर्ट में भारत के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक द्वारा की गई “निराधार और पक्षपातपूर्ण” टिप्पणियों पर गंभीर आपत्ति व्यक्त की। उन्होंने कहा, “मैं अपने देश के संबंध में रिपोर्ट में की गई आधारहीन और पक्षपातपूर्ण टिप्पणियों पर गंभीर आपत्ति व्यक्त करता हूं।” सैकिया ने पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकवादी हमले के नागरिक पीड़ितों के संबंध में विशेष प्रतिवेदक (एसआर) द्वारा अपनाए गए “पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण” की कड़ी निंदा की, जिसे उन्होंने “सांप्रदायिक दृष्टिकोण” से देखा। 


भारत ने क्या कहा

भारत ने संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट पर कहा कि पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकवादी हमले को म्यांमार से विस्थापित लोगों से जोड़ने का दावा बिल्कुल भी “तथ्यात्मक नहीं है”। सैकिया ने कहा, “मेरा देश विशेष प्रतिवेदक द्वारा किए गए इस तरह के पूर्वाग्रह और संकीर्ण विश्लेषण को अस्वीकार करता है।” म्यांमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर अपनी हालिया रिपोर्ट में विशेष प्रतिवेदक थॉमस एच एंड्रयूज ने कहा, “अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर में हिंदू पर्यटकों पर हुए आतंकवादी हमले के बाद, म्यांमार के शरणार्थी भारत में गंभीर दबाव में हैं, भले ही उस हमले में म्यांमार का कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं था।” 


यूएन ने भारत पर लगाए बेतुके आरोप

एंड्रयूज ने आरोप लगाया कि भारत में म्यांमार के शरणार्थियों को “हाल के महीनों में भारतीय अधिकारियों द्वारा बुलाया गया, हिरासत में लिया गया, पूछताछ की गई और निर्वासित करने की धमकी दी गई।” भारतीय प्रतिनिधि ने इस पर संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ से आग्रह करते हुए कि वे “असत्यापित और पूर्वाग्रह से ग्रस्त मीडिया खबरों पर भरोसा न करें, जिनका एकमात्र उद्देश्य भारत को बदनाम करना प्रतीत होता है। सैकिया ने रेखांकित किया कि देश में 20 करोड़ से अधिक मुसलमान रहते हैं, जो विश्व की मुस्लिम आबादी का लगभग 10 प्रतिशत है, तथा सभी धर्मों के लोगों के साथ सद्भाव से रह रहे हैं। सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि म्यांमार में बिगड़ती सुरक्षा और मानवीय स्थिति भारत के लिए “गहरी चिंता का विषय” बनी हुई है, विशेष रूप से इसके “सीमा पार प्रभाव” के कारण, जिसमें “मादक पदार्थ, हथियार और मानव तस्करी जैसे अंतरराष्ट्रीय अपराधों” से उत्पन्न चुनौतियां शामिल हैं।(भाषा)

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