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सीधे-सीधे गुंडागर्दी पर उतर आया चीन? चाहकर भी विदेश नहीं जा पाए ताइवान के राष्ट्रपति

ताइवान के राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते का अफ्रीका दौरा कथित रूप से चीन के दबाव के कारण रद्द हो गया, क्योंकि सेशेल्स, मॉरीशस और मेडागास्कर ने उड़ान अनुमति वापस ले ली। ताइवान ने इसे चीन की दखलअंदाजी बताया।

Taiwan China conflict, Lai Ching-te Africa visit cancelled, Taiwan diplomatic isolation- India TV Hindi
Image Source : AP ताइवान के राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते।

ताइपे: ताइवान के राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते को अपना प्रस्तावित अफ्रीका दौरा कथित तौर पर चीन की हरकतों की वजह से टालना पड़ा है। दरअसल, उन्हें अपनी यात्रा इसलिए रद्द करनी पड़ी क्योंकि रास्ते में आने वाले 3 देशों ने अचानक उनके विमान को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति वापस ले ली। ताइवान का आरोप है कि यह सब चीन के दबाव में हुआ है और उसी के कहने पर सेशेल्स, मॉरीशस और मेडागास्कर ने ये कदम उठाया है। बता दें कि इससे पहले 2023 में ताइवान की तत्कालीन राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने एस्वातिनी का दौरा किया था और वहां के राजा म्स्वाती तृतीय से मुलाकात की थी।

'चीन के दबाव के चलते रद्द किया परमिट'

बता दें कि राष्ट्रपति लाइ 22 से 26 अप्रैल के बीच एस्वातिनी का दौरा करने वाले थे, जो अफ्रीका में ताइवान का एकमात्र राजनयिक सहयोगी देश है। लेकिन ताइपे में राष्ट्रपति कार्यालय के महासचिव पान मेंग-आन ने बताया कि अचानक से सेशेल्स, मॉरीशस और मेडागास्कर ने बिना किसी पूर्व सूचना के उड़ान अनुमति रद्द कर दी। पान मेंग-आन के मुताबिक, 'इन देशों द्वारा फ्लाइट परमिट रद्द किया जाना चीन के भारी दबाव और आर्थिक दबाव की वजह से हुआ है।' उन्होंने इसे अन्य देशों के आंतरिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप बताया और कहा कि इससे क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ता है और ताइवान के लोगों की भावनाएं आहत होती हैं।

ताइवान को अपना हिस्सा मानता है चीन

हालांकि, इस मामले पर चीन के विदेश मंत्रालय, मॉरीशस सरकार और मेडागास्कर के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उसे अलग हुआ प्रांत बताता है। चीन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर वह ताइवान को बलपूर्वक अपने में मिला सकता है। इसी वजह से चीन उन देशों को ताइवान से आधिकारिक संबंध रखने की अनुमति नहीं देता, जिनके साथ उसके अपने कूटनीतिक संबंध हैं। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने ताइवान के सहयोगी देशों को अपने पक्ष में करने की कोशिश तेज कर दी है।

ताइवान के संबंध सिर्फ 12 देशों के साथ

ताइवान के सहयोगी देशों को अपने पक्ष में करने के लिए चीन विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे और अन्य परियोजनाओं में निवेश करता रहा है। फिलहाल ताइवान के केवल 12 देशों के साथ ही औपचारिक राजनयिक संबंध बचे हैं, जिनमें ज्यादातर छोटे देश हैं और वे लैटिन अमेरिका, कैरेबियाई और प्रशांत क्षेत्र में स्थित हैं। हाल ही में नाउरू ने जनवरी 2024 में ताइवान से संबंध तोड़कर चीन को मान्यता दे दी थी। इससे पहले 2023 में होंडुरास और 2021 में निकारागुआ भी ऐसा कर चुके हैं।

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