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Hindi News विदेश एशिया परवान चढ़ी भारत और अरब की दोस्ती, जानें उन शहजादों के बारे में जो लिख रहे संबंधों की नई इबारत

परवान चढ़ी भारत और अरब की दोस्ती, जानें उन शहजादों के बारे में जो लिख रहे संबंधों की नई इबारत

भारत और अरब देशों के बीच संबंध लगातार मजबूत होते जा रहे हैं। दुबई के प्रिंस शेख हमदान, अबू धाबी के प्रिंस शेख खालिद और सऊदी अरब के प्रिंस सलमान जैसे युवा नेता इन संबंधों में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

File photo of Prime Minister Narendra Modi and UAE President Mohamed bin Zayed Al Nahyan - India TV Hindi Image Source : ANI File photo of Prime Minister Narendra Modi and UAE President Mohamed bin Zayed Al Nahyan

India Arab Relations: अरब देश विश्व के उन क्षेत्रों में शामिल हैं जहां प्राकृतिक संसाधनों की भरमार है। इन देशों में राजनीतिक व्यवस्था और विकास के बीच जटिल संबंध हैं। विकास की राजनीति यहां कई सामाजिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक कारकों से प्रभावित होती है। अरब देशों की अधिकांश सरकारें राजशाही शासनों पर आधारित हैं। सऊदी अरब, कुवैत, कतर जैसे देशों में आज भी शाही परिवारों का शासन है लेकिन बहुत कुछ बदलता हुआ भी नजर आ रहा है। अरब देशों के युवा दुनियादारी को नए नजरिये से देख रहे हैं। अपने देश को दुनिया के साथ लेकर चल रहे हैं। एजेंडे में मॉर्डनाइजेशन और संस्कृति दोनों शामिल हैं। नया अरब आने वाले समय के लिए खुद को तैयार कर रहा है। 

बदल रहा है अरब

दुबई के प्रिंस शेख हमदान, अबू धाबी के प्रिंस शेख खालिद और सऊदी अरब के प्रिंस सलमान जैसे युवा नेता विश्व के पटल पर अपनी पहचान से दुनिया का परिचय करवा रहे हैं। 42 साल के शेख हमदान, 43 साल के शेख खालिद और 39 साल के प्रिंस सलमान अरब देशों की उस नई पीढ़ी को आगे ले जा रहे हैं जो आधुनिकता के साथ-साथ बदलाव को अपना रही है। नई सोच पुरानी रुढ़ियों को चुनौती दे रही है, मजहब को कट्टरता से दुराव हो रहा है और बदलते वैश्विक हालात में अरब भी बदल रहा है। हाल के वर्षों पर नजर डालें तो अरब देशों ने विविधता को अपनाया है। पर्यटन, तकनीक, हरित ऊर्जा और शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयोग हो रहे हैं। जैसे सऊदी अरब की 'विजन 2030' योजना, जिसका उद्देश्य तेल पर निर्भरता को कम करना और अर्थव्यवस्था को अलग दिशा देना है।

दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान की भारत यात्रा

अरब के युवा नेताओं पर बात करते हुए सबसे उससे पहले चर्चा दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद अल मकतूम की करते हैं। शेख हमदान भारत की यात्रा पर हैं। दुबई के क्राउन प्रिंस के रूप में यह शेख हमदान की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि क्राउन प्रिंस की यात्रा भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी और दुबई के साथ हमारे बहुआयामी संबंधों को मजबूत करेगी। 

भारत के पास है अवसर

शेख हमदान की 'दुबई ग्लोबल' पहल, जो दुबई को वैश्विक व्यापार केंद्र बनाने पर केंद्रित है, भारत की आर्थिक दृष्टिकोण से मेल खाती है। शेख हमदान रक्षा मंत्री भी हैं, इस वजह से उनकी यात्रा और भी अहम हो जाती है। भारत खाड़ी क्षेत्र में अपनी सामरिक उपस्थिति बढ़ाना चाहता है और शेख हमदान की यह यात्रा इस दिशा में भी मददगार साबित होगी। 

'हिंद' से है प्यार

शेख हमदान हाल ही में पिता बने हैं, उनके घर एक बच्ची ने जन्म लिया है। इस बच्ची का 'हिंद' रखा गया है। बेटी का नाम 'हिंद' रखना भारत के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है। शेख हमदान अपने देश के सोशल मीडिया स्टार भी हैं। एक्स पर उनके 34 लाख फॉलोअर्स हैं, जबकि फेसबुक पर 21 लाख लोग उनसे जुड़े हैं। सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और उनकी आधुनिक जीवनशैली युवाओं को प्रेरित करती है। 

Image Source : x pm modiदुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद अल मकतूम (थ), पीएम नरेंद्र मोदी (R)

शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान

शेख हमदान के बाद अब बात शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की करते हैं। शेख खालिद ना केवल एक युवा और दूरदर्शी नेता हैं बल्कि भारत के साथ UAE के रिश्तों को नई ऊर्जा देने वाले महत्वपूर्ण शख्सियत भी हैं। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और भारत के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, और आर्थिक रिश्ते दशकों पुराने हैं। इन मजबूत संबंधों को और अधिक गहराई प्रदान करने में शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। 

द्विपक्षीय संबंधों में योगदान

शेख खालिद ने भारत और UAE के बीच के आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को सुदृढ़ करने के लिए कई उच्च स्तरीय बैठकों और साझेदारियों को प्रोत्साहित किया है। उन्होंने व्यापार, निवेश, उर्जा, और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दिया है। भारत और UAE के बीच Comprehensive Strategic Partnership (व्यापक रणनीतिक साझेदारी) की जो नींव पहले से रखी गई थी, उसे उन्होंने नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य किया।

सांस्कृतिक जुड़ाव

भारत और UAE के सांस्कृतिक संबंध भी गहरे हैं। UAE में लाखों भारतीय प्रवासी रहते हैं और वहां की आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। शेख ख़ालिद ने इस प्रवासी समुदाय के महत्व को समझते हुए भारत के साथ सांस्कृतिक मेल-जोल और सामाजिक एकता को प्राथमिकता दी है।

निवेश और व्यापार

शेख खालिद की देखरेख में अबू धाबी और भारत के बीच निवेश के कई समझौते हुए हैं। भारत के बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, और स्टार्टअप सेक्टर में UAE का निवेश तेजी से बढ़ा है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) जैसे समझौतों ने व्यापार को नई दिशा दी है।

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान

शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बाद अब बात सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की करते हैं। भारत और सऊदी अरब के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से घनिष्ठ संबंध रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में इन संबंधों को और अधिक गहराई मिली है, खासकर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के नेतृत्व में। दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा, सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

Image Source : fileसऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (R) पीएम मोदी (L)

मोहम्मद बिन सलमान की भूमिका

MBS, जो सऊदी अरब के डिफैक्टो शासक माने जाते हैं, ने "विजन 2030" के तहत देश को तेल-आधारित अर्थव्यवस्था से विविध क्षेत्रों में ले जाने का लक्ष्य रखा है। इस योजना में भारत एक प्रमुख साझेदार के रूप में उभरा है। उन्होंने भारत की यात्रा कर निवेश के कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए और भारतीय नेतृत्व के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया।

सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग

दोनों देशों के बीच रक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग भी लगातार बढ़ रहा है। खाड़ी क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति और सऊदी अरब की भूमिका को देखते हुए, यह सहयोग दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद है। करीब 25 लाख भारतीय नागरिक सऊदी अरब में काम कर रहे हैं और दोनों देशों के बीच मजबूत मानवीय संबंध बनाए हुए हैं। ये प्रवासी भारत को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भेजते हैं और सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में भी योगदान करते हैं।

अरब देशों का युवा नेतृत्व भारत के संबंधों के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। व्यापार, रणनीति और सांस्कृतिक संबंधों में बढ़ती साझेदारी से स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में यह संबंध और भी मजबूत होंगे। 

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