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...तो अब जेल से छूट जाएगा गद्दाफी का बेटा? बस पूरी करनी होगी लेबनान की ये शर्त

लेबनान की अदालत ने हनीबल गद्दाफी की रिहाई की सशर्त मंजूरी दी है। उन्हें 11 मिलियन डॉलर की जमानत देनी होगी और दो महीने तक विदेश यात्रा पर रोक रहेगी। बगैर किसी आरोप के 2015 से जेल में बंद हनीबल की बिगड़ती सेहत को देखते हुए यह फैसला आया है।

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Image Source : AP हनीबल गद्दाफी की यह तस्वीर 2011 में ली गई थी।

बेरूत: लेबनान की एक अदालत ने लीबिया के दिवंगत नेता मुअम्मर गद्दाफी के बेटे हनीबल गद्दाफी की रिहाई का आदेश दिया है। लेकिन अदालत ने साथ ही शर्त भी रखी है कि उन्हें इसके लिए 11 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी कि करीब 97 करोड़ रुपये की जमानत राशि अदा करें। इसके साथ ही उनकी रिहाई की एक और शर्त यह है कि वे अगले 2 महीनों तक लेबनान से बाहर यात्रा नहीं कर सकेंगे। यह फैसला शुक्रवार को बेरूत की अदालत में जज जाहेर हमादे ने सुनाया।

एक दशक से जेल में बंद हैं हनीबल गद्दाफी

बता दें कि हनीबल गद्दाफी पिछले एक दशक से बेरूत की जेल में बिना किसी औपचारिक आरोप के बंद हैं। उनकी रिहाई का यह आदेश तब आया है, जब उनके वकीलों ने बताया कि उनकी तबीयत जेल में खराब हो रही है। 2023 में लीबिया ने उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए उनकी रिहाई की औपचारिक मांग की थी। हनीबल ने अपनी हिरासत के खिलाफ भूख हड़ताल भी की थी, जिसके बाद उनकी सेहत और बिगड़ गई थी।

'हनीबल के पास इतनी बड़ी रकम नहीं'

शुक्रवार को हनीबल को बेरूत के जस्टिस पैलेस में पेश किया गया, जहां जज ने जमानत की शर्तों के साथ उनकी रिहाई का आदेश दिया। हालांकि, उनके वकील चारबेल मिलाद अल-खूरी ने बताया कि हनीबल के पास इतनी बड़ी राशि नहीं है और न ही उनके पास अपने खातों तक पहुंच है, जिससे वे जमानत की रकम अदा कर सकें। हनीबल गद्दाफी को 2015 में लेबनान के बैलबेक शहर से अगवा किया गया था। कुछ लेबनानी उग्रवादियों ने उनसे एक प्रमुख शिया धर्मगुरु मौसा अल-सदर के बारे में जानकारी मांगी थी, जो 1978 में लीबिया की यात्रा के दौरान लापता हो गए थे। बाद में लेबनानी पुलिस ने हनीबल को बैलबेक से हिरासत में लिया और तब से वे बेरूत की जेल में बंद थे।

क्या अभी भी जिंदा हैं मौसा अल-सदर?

मौसा अल-सदर का मामला लेबनान में लंबे समय से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। उनके परिवार का मानना है कि वे शायद अभी भी लीबिया की किसी जेल में जीवित हैं, हालांकि ज्यादातर लेबनानी मानते हैं कि अगर वह जिंदा होते तो 96 साल के होते, और ऐसे में उनकी मौत की संभावना ज्यादा है। हनीबल से इस मामले में कई बार पूछताछ की गई, लेकिन कोई ठोस जवाब या सबूत नहीं मिला।बताया जा रहा है कि हनीबल की रिहाई का यह फैसला लेबनान और लीबिया के बीच कूटनीतिक रिश्तों में एक नया मोड़ ला सकता है।

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