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ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका के युद्ध में कितने लोगों की मौत हुई? सामने आ गया आंकड़ा, यहां जानें

ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के युद्ध में बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं। इससे जुड़ा एक आंकड़ा भी सामने आया है, जिसमें पुरुष और महिलाओं की मौतों की स्पष्ट संख्या भी बताई गई है।

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Image Source : AP/REPRESENTATIVE PIC ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के युद्ध में बड़ी संख्या में लोग मारे गए

तेहरान: ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के युद्ध में 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। खुद ईरान ने ये जानकारी दी है। ईरान का कहना है कि युद्ध में 3,375 लोग मारे गए हैं और इनके शवों की पहचान कर ली गई है।

ईरान के फोरेंसिक मेडिसिन संगठन के प्रमुख अब्बास मस्जेदी अरानी ने बताया कि अधिकारियों ने अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए युद्ध में मारे गए 3,375 लोगों के शवों की पहचान कर ली है। ईरानी मीडिया को दिए एक बयान में अरानी ने कहा कि मृतकों में 2,875 पुरुष और लगभग 500 महिलाएं शामिल हैं।

इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता विफल

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को रोकने और शांति के प्रयासों के लिए जो वार्ता हुई, वह विफल रही है। ऐसे में ये कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच कड़वाहट और बढ़ सकती है। 

हालांकि इस बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन से बात की है। पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत में शांति प्रयासों में मदद करने की तत्परता जताई है।

इंटरफैक्स समाचार एजेंसी ने बताया कि पुतिन ने कहा कि रूस मध्य पूर्व में शांति समझौते में सहयोग जारी रखने के लिए तैयार है। क्रेमलिन ने बातचीत के विवरण में कहा, "व्लादिमीर पुतिन ने संघर्ष के राजनीतिक और राजनयिक समाधान की खोज में और अधिक सहयोग देने तथा मध्य पूर्व में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति प्राप्त करने के प्रयासों में मध्यस्थता करने की अपनी तत्परता पर जोर दिया है।"

 ईरान के सुरक्षा प्रमुख ने अमेरिका को दिखाई आंखें

इससे पहले इस्लामाबाद शांति वार्ता फेल होने के बाद ईरान के सुरक्षा प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने रूसी मीडिया RT को विशेष साक्षात्कार में अमेरिका को आंखें दिखाईं और कहा कि हमसे ज्यादा अमेरिकियों को इस समझौते की जरूरत है। उन्होंने ये भी कहा कि अगर अमेरिका, ईरान की शर्तों को नहीं मानता है, तो हम अपना रास्ता खुद चुनेंगे, और कुछ भी नहीं बदलेगा।

अब देखना ये होगा कि मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने के लिए दोनों देश (अमेरिका-ईरान) समझौता करते हैं या फिर तनाव फिर बढ़ जाएगा। 

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