तेहरान/वाशिंगटन: ईरान के साथ जारी अमेरिका और इजरायल की जंग में हर दिन कोई न कोई बड़ा अपडेट सामने आ रहा है। इसी कड़ी में अमेरिकी सेना के एक कमांडर ने खुलासा किया है कि कैसे वह इस जंग में ईरान के ड्रोन को उसके ही खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के ड्रोन को पकड़कर उसकी डिजाइन को बेहतर बनाया और अब उसी तरह के ड्रोन से ईरान पर ही हमले कर रही है। यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने अपनी ताजा प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात बताई।
'LUCAS मूल रूप से ईरानी ड्रोन डिजाइन था'
एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा, 'LUCAS मूल रूप से ईरानी ड्रोन डिजाइन था। हमने इसे पकड़ा, उसके अंदर के पार्ट्स निकाले, अमेरिका भेजा, थोड़ा 'मेड इन अमेरिका' लगाया, वापस यहां लाए और अब ईरानियों पर ही इसे चला रहे हैं।' LUCAS का फुल फॉर्म Low-Cost Unmanned Combat Attack System है, जो ईरान के शाहेद-136 ड्रोन पर आधारित है। अमेरिका ने इसे कैप्चर करके रिवर्स-इंजीनियरिंग की और बेहतर अमेरिकी तकनीक से सुधार कर युद्ध में इस्तेमाल किया। एडमिरल कूपर ने इसे 'बेहद महत्वपूर्ण' बताया और कहा कि ये ड्रोन सस्ते, तेजी से बनने वाले और बहुत प्रभावी साबित हो रहे हैं।
'अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के हमलों में कमी'
बता दें कि यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले जारी हैं। 28 फरवरी को शुरू हुए इस ऑपरेशन में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत कई बड़े नेता मारे जा चुके हैं। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, लेकिन अब ये हमले काफी कम हो गए हैं। एडमिरल कूपर ने बताया कि पिछले 72 घंटों में अमेरिकी बॉम्बर्स ने ईरान के अंदर करीब 200 लक्ष्यों पर हमला किया है। इन हमलों से ईरान की मिसाइल और ड्रोन हमले करने की क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है।
हिजबुल्लाह को निशाना बना रहा है इजरायल
कूपर ने आंकड़े देते हुए कहा कि ऑपरेशन शुरू होने के मुकाबले पिछले 24 घंटों में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमले 90 प्रतिशत कम हो गए हैं। उन्होंने कहा कि ड्रोन हमले 83 प्रतिशत घट गए हैं और अब तक 30 से ज्यादा ईरानी जहाज नष्ट हो चुके हैं। अमेरिका ने हाल ही में एक ईरानी ड्रोन कैरियर जहाज पर हमला किया गया, जो अब पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। इजरायल भी तेहरान पर हमले जारी रखे हुए हैं और जंग को लेबनान तक फैला दिया है, जहां हिजबुल्लाह को निशाना बनाया जा रहा है। अभी भी दोनों तरफ से हमले हो रहे हैं हालांकि ईरान की तरफ से हमलों में कमी देखी जा रही है।
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