A
Hindi News विदेश एशिया Imran Khan: पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने की सुनवाई, सरकारी संस्थाओं को दिया ये बड़ा आदेश

Imran Khan: पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने की सुनवाई, सरकारी संस्थाओं को दिया ये बड़ा आदेश

पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल ने कहा कि नेशनल असेंबली को भंग करने के संबंध में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति द्वारा शुरू किए गए सभी आदेश और कदम अदालत के आदेश के अधीन होंगे। 

Prime Minister of Pakistan Imran Khan- India TV Hindi Image Source : PTI Prime Minister of Pakistan Imran Khan

पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने रविवार को प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव खारिज किए जाने और खान की सिफारिश पर सदन भंग करने को राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद सभी सरकारी संस्थाओं को कोई भी ‘‘असंवैधानिक’’ कदम उठाने से बचने का आदेश दिया।

पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल ने कहा कि नेशनल असेंबली को भंग करने के संबंध में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति द्वारा शुरू किए गए सभी आदेश और कदम अदालत के आदेश के अधीन होंगे। न्यायाधीश बंदियाल ने साथ ही इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई एक दिन के लिए स्थगित कर दी। 

इससे पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने देश के प्रधानमंत्री इमरान खान की सिफारिश पर नेशनल असेंबली (एनए) को भंग कर दिया। इससे कुछ ही देर पहले नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष कासिम सूरी ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। 

खान ने संसद के निचले सदन 342 सदस्यीय नेशनल असेंबली में प्रभावी तौर पर बहुमत खो दिया था। प्रधान न्यायाधीश बंदियाल ने इस पूरी स्थिति का संज्ञान लिया और तीन सदस्यीय पीठ ने सप्ताहांत के बावजूद प्रारंभिक सुनवाई की तथा राष्ट्रपति अल्वी और नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष सूरी सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए। 

सुप्रीम कोर्ट ने की सुनवाई-

अदालत ने सभी पक्षों को कोई भी असंवैधानिक कदम उठाने से बचने का आदेश दिया और मामले की सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी। प्रधान न्यायाधीश बंदियाल ने कहा कि नेशनल असेंबली को भंग करने के संबंध में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति द्वारा शुरू किए गए सभी आदेश और कदम अदालत के आदेश के अधीन होंगे। 

इससे पहले, विपक्ष ने शीर्ष अदालत से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था और सदन में विपक्ष के नेता शहबाज शरीफ ने नेशनल असेंबली को भंग किए जाने को चुनौती देने की अपनी पार्टी के फैसले की घोषणा की थी। 

उन्होंने कहा, ‘‘हम उपाध्यक्ष के फैसले और प्रधानमंत्री की सलाह को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने जा रहे हैं।’’ सुप्रीम कोर्ट बार के अध्यक्ष अहसान भून ने कहा कि प्रधानमंत्री और उपाध्यक्ष की कार्रवाई संविधान के खिलाफ है और ‘‘संविधान के अनुच्छेद 6 के तहत उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।’’ 

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने भी एक याचिका दायर कर अदालत से नेशनल असेंबली भंग करने के साथ-साथ उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) के फैसले को असंवैधानिक घोषित करने का अनुरोध किया है। सूरी द्वारा अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिए जाने के बाद यह संकट उत्पन्न हुआ। 

इससे प्रधानमंत्री खान को संसद को भंग करने के लिए देश के राष्ट्रपति को एक सिफारिश करने का मौका मिल गया, जो वह अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान का कोई परिणाम आने तक नहीं कर सकते थे। संयुक्त विपक्ष आठ मार्च को अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया था। देश की राजनीतिक स्थिति तब तक विपक्ष के पक्ष में थी जब तक कि खान यूक्रेन पर एक स्वतंत्र विदेश नीति का अनुपालन करने को लेकर अमेरिका द्वारा उन्हें सत्ता से बेदखल करने की साजिश की बात लेकर नहीं आए थे। 

जाने-माने संवैधानिक अधिवक्ता सलमान अकरम राजा ने कहा, ‘‘उपाध्यक्ष द्वारा अपनायी गई पूरी प्रक्रिया और नेशनल असेंबली को भंग करने के लिए प्रधानमंत्री की सलाह असंवैधानिक है।’’ उन्होंने कहा कि पूरे विवाद पर उच्चतम न्यायालय फैसला करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘मूल मुद्दा उपाध्यक्ष द्वारा फैसले की वैधता का निर्धारण करना है। अगर शीर्ष अदालत कहती है कि फैसला कानूनों के अनुसार है, तो प्रधानमंत्री की सलाह भी कानून के अनुसार होगी।’’ 

भारतीय वकील और पूर्व मंत्री अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि प्रधानमंत्री खान का कदम ‘‘संवैधानिक रूप से गलत’’ है। उन्होंने मुद्दे पर कुछ बिंदुओं को उल्लेखित करते हुए ट्वीट किया, ‘‘किसी भी ‘कॉमन लॉ सिस्टम’ में किसी भी उपाध्यक्ष के पास अविश्वास प्रस्ताव को राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर खारिज करने की शक्ति नहीं है।’’

Latest World News