Iraq First Lady Kurds Statement: इराक की फर्स्ट लेडी शनाज़ इब्राहिम अहमद ने अमेरिका, इजरायल और ईरान से Kurds को जंग में ना घसीटने की गुहार लगाई है। शनाज़ इब्राहिम अहमद के ऑफिस की तरफ से जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज में लिखा है कि हमारे पास अपने अनुभव हैं। खाली वादें भी हमें याद हैं। अक्सर कुर्दों को तभी याद किया जाता है जब उनकी शक्ति या उनके बलिदान की जरूरत होती है। इसी कारण से मैं इस संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से गुहार लगाती हूं कि Kurds को अकेला छोड़ दें। हम किराए पर लड़ने वाले हथियार नहीं हैं।
मुश्किल समय में Kurds को अकेला छोड़ा गया
शनाज़ इब्राहिम अहमद के मुताबिक, सन् 1991 में कुर्दों से कहा गया था कि वे सद्दाम हुसैन के शासन के खिलाफ विद्रोह करें। लेकिन जब परिस्थितियां और प्राथमिकताएं बदलीं, तो उन्हें अकेला उनके हाल पर छोड़ दिया गया। जब उस शासन ने बगावत को कुचलने के लिए हेलीकॉप्टर गनशिप और टैंकों का उपयोग किया, तब हमें बचाने के लिए कोई नहीं आया था। आज भी वो बातें हमारे दिमाग में ताजा हैं और गहराई से दर्ज हैं।
ISIS से जंग के बावजूद सम्मान नहीं मिला
आज हम उस दौर को 'Raparin' के नाम से याद करते हैं और उससे मिले सबक को कभी नहीं भूलते हैं। हाल में हमने ये भी देखा कि नॉर्थ-ईस्ट सीरिया, जिसे रोजावा कहा जाता है, वहां क्या हुआ। तमाम वादों के बावजूद, और ISIS के खिलाफ जंग में सीरिया के कुर्दों के आगे के मोर्चे पर खड़े रहने के बाद भी, हमने देखा कि उनके साथ कैसा व्यवहार हुआ।
Kurds नहीं लड़ना चाहते दूसरों की जंग
आज इराक के कुर्दों ने आखिरकार कुछ हद तक सम्मानजनक जीवन और स्थिरता पा ली है। इसलिए कुर्दों के लिए यह बहुत कठिन, बल्कि करीब-करीब असंभव है कि वे दुनिया की महाशक्तियों के हाथों मोहरे की तरह उपयोग होना स्वीकार करें।
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