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अमेरिकी हमलों के बाद भी नहीं ठिठका तेहरान, इस्फहान सुरक्षित; इजरायल ने कहा-संवर्धित यूरेनियम भंडार के करीब है ईरान

अमेरिका के बी2 बॉम्बरों के हमलों के बाद भी ईरान का इस्फहान परमाणु केंद्र पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ है। लिहाजा ईरान के परमाणु मिशन पर इन हमलों से कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। दावा है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन के करीब है।

अमेरिकी हमले में तबाह ईरान का परमाणु ठिकाना (बाएं) और ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई (दाएं)- India TV Hindi
Image Source : AP अमेरिकी हमले में तबाह ईरान का परमाणु ठिकाना (बाएं) और ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई (दाएं)

वाशिंगटन: अमेरिका के बी2-बॉम्बरों द्वारा तेहरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमलों के बाद भी ईरान का परामणु मिशन थमा नहीं है, बल्कि वह यूरेनियम संवर्धन के बेहद करीब है। यह दावा इजरायल ने किया है। इज़राइल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा करते कहा कि ईरान अब भी अपने एक परमाणु केंद्र में गहराई में छिपाए गए संवर्धित यूरेनियम के भंडार तक पहुंच सकता है, भले ही उस पर अमेरिका ने हमला किया हो। इजरायल के इस बयान ने दुनिया भर में खलबली मचा दी है। 

इस्फहान परमाणु ठिकाना सुरक्षित

इज़राइल का मानना है कि ईरान का अधिकतर संवर्धित यूरेनियम तीसरे टारगेट स्थल यानि इस्फ़हान परमाणु केंद्र में गहराई में सुरक्षित है। वह अमेरिकी हमलों के बावजूद पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ है। इजरायल का  यह बयान अमेरिकी हमलों के प्रभाव को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में कहा था कि अमेरिका द्वारा किए गए हमलों ने ईरान के फोर्दो, नतांज और इस्फ़हान समेत तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों को पूरी तरह "नष्ट" कर दिया है। 

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने भी माना ठिकाना अभी भी सुरक्षित

अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) की एक प्रारंभिक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि हमलों से इन ठिकानों को "काफी नुकसान" पहुंचा है, लेकिन वे पूरी तरह नष्ट नहीं हुए। बता दें कि इन हमलों में अमेरिका ने B-2 स्टील्थ बमवर्षकों का इस्तेमाल किया था। इसके ज़रिए बंकर बस्टर बम गिराए गए थे। ये ऐसे बम होते हैं जो ज़मीन के भीतर गहराई में जाकर विस्फोट करते हैं। इन बमों का निर्माण करने वाली अमेरिकी एजेंसी ने कहा है कि वह अभी डेटा का इंतज़ार कर रही है ताकि यह निश्चित किया जा सके कि बमों ने अपने लक्ष्य को कितनी प्रभावी रूप से भेदा।

ईरानी का क्या है कहना?

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने एक साक्षात्कार में स्वीकार किया कि अमेरिकी हमलों से उनके परमाणु केंद्रों को इतना गंभीर नुकसान हुआ है कि ईरानी अधिकारी अब तक उन स्थानों तक पहुंच नहीं पाए हैं। उन्होंने टकर कार्लसन के साथ बातचीत में यह भी कहा कि ईरान IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) के साथ सहयोग फिर से शुरू करने के लिए तैयार है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र निरीक्षकों को पूर्ण और निर्बाध पहुंच देने का वादा अभी नहीं कर सकता।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

परमाणु और अप्रसार मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इज़रायल के हमलों की आशंका के चलते ईरान ने पहले ही अपने यूरेनियम भंडारों को अन्य सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया होगा। हालांकि, इज़राइली अधिकारी का कहना है कि "ईरान का संवर्धित यूरेनियम इन्हीं तीन ठिकानों में था और उसे कहीं और नहीं ले जाया गया।" बावजूद वह पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ। 

IAEA का आकलन

IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा था कि तीनों ईरानी साइटों की संवर्धन क्षमता को काफी हद तक नष्ट कर दिया गया है। मगर उन्होंने यह भी कहा, "सच कहूं तो कोई यह दावा नहीं कर सकता कि सब कुछ समाप्त हो गया है और वहां कुछ भी नहीं बचा है।" (एपी)

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