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जैश-ए-मोहम्मद ने महिलाओं को आतंकी बनाने के लिए शुरू किया ऑनलाइन कोर्स, मसूद अज़हर की बहनें करेंगी लीड

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद अब एक महिला ब्रिगेड तैयार कर रहा है और इसका नाम जमात उल-मुमिनात रखा है। महिलाओं को आतंकी बनाने के लिए ऑनलाइन कोर्स भी शुरू किया गया है।

 आतंकवादी मसूद अजहर- India TV Hindi
Image Source : PTI आतंकवादी मसूद अजहर। फाइल

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने महिलाओं को भर्ती करने के लिए ऑनलाइन जिहादी कोर्स ‘तुफत अल-मुमिनात’ शुरू किया है। खुंखार आतंकी मसूद अज़हर की बहनें और उमर फारूक की पत्नी महिलाओं को लीड करेंगी। हर पार्टिसिपेंट से 500 रुपये डोनेशन लिया जाएगा। 

महिला बिग्रेड तैयार कर रहा है जैश-ए-मोहम्मद 

इस महीने की शुरुआत में हमने बताया था कि कैसे UN द्वारा घोषित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद एक महिला ब्रिगेड तैयार कर रहा है और इसका नाम जमात उल-मुमिनात रखा है। अब हमारे पास मौजूद एक नए एक्सक्लूसिव डॉक्यूमेंट और डिटेल्स से पता चलता है कि आतंकवादी ग्रुप ने अब फंड इकट्ठा करने और अपनी महिला ब्रिगेड में ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को भर्ती करने के लिए एक ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स शुरू किया है। इस कोर्स का नाम “तुफत अल-मुमिनात” है। 

मसूद अज़हर के परिवार की महिलाएं करेंगी लीड

आतंकी संगठन को मज़बूत करने और अपनी महिला ब्रिगेड में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों के महिला परिवार के सदस्य, जिनमें मसूद अज़हर और उसके कमांडरों के रिश्तेदार भी शामिल हैं। ऑनलाइन कोर्स में महिलाओं को जिहाद, धर्म और इस्लाम के नज़रिए से उनके काम सिखाएंगे। ऑनलाइन लाइव लेक्चर के ज़रिए भर्ती का यह कैंपेन 8 नवंबर से शुरू होने वाला है। मसूद अज़हर की दो बहनें, सादिया अज़हर और समायरा अज़हर, हर दिन 40 मिनट के लिए ऑनलाइन मीटिंग प्लेटफॉर्म के ज़रिए महिलाओं को जैश-ए-मोहम्मद की महिला ब्रिगेड जमात उल-मुमिनात में शामिल होने के लिए बढ़ावा देने के लिए क्लास लेंगी। अपनी नई बनी जमात उल-मुमिनात में मौलाना मसूद अजहर ने इस औरतों की ब्रिगेड की कमान अपनी छोटी बहन सादिया अजहर को दी है, जिसका पति यूसुफ अजहर ऑपरेशन सिंदूर में मारा गया था। 

महिलाओं को आतंकी बनाने के लिए कर रहा ये काम

बता दें कि 8 अक्टूबर को आतंकी मसूद अज़हर ने जैश-ए-मोहम्मद की महिला ब्रिगेड जमात उल-मुमिनात बनाने का ऐलान किया था और 19 अक्टूबर को रावलकोट POK में महिलाओं को ग्रुप में लाने के लिए “दुख्तरान-ए-इस्लाम” नाम का एक इवेंट किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान में कट्टरपंथी सामाजिक नियमों के हिसाब से औरतों का अकेले बाहर निकलना गलत माना जाता है, इसलिए जैश-ए-मोहम्मद अब औरतों को भर्ती करने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहा है ताकि वह ISIS, हमास और LTTE की तरह अपने मर्दों के टेररिस्ट ब्रिगेड के साथ औरतों की टेरर ब्रिगेड बना सके और शायद उनका इस्तेमाल सुसाइड/फिदायीन हमलों के लिए कर सके।

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