काठमांडूः नेपाल में शी जिनपिंग की किताबों को कचरे की तरह जलाने की घटना ने नेपाल-चीन संबंधों में नया विवाद खड़ा कर दिया है। यह घटना नेपाल के मोरंग जिले के बुढ़ीगंगा स्थित मनमोहन टेक्निकल कॉलेज में शनिवार रात हुई। जहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पुरानी किताबों और दस्तावेजों को जलाया गया। इसमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रसिद्ध किताब “The Governance of China” की सैकड़ों प्रतियां भी शामिल थीं। इसे लेकर चीन ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है।
चीन ने जाहिर की चिंता
घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें किताबों को आग के हवाले करते दिखाया गया। वीडियो के फैलते ही चीन के काठमांडू स्थित दूतावास ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। चीनी दूतावास ने नेपाल के विदेश मंत्रालय को नोट वर्बेल भेजकर घटना पर गहरी चिंता जताई और दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की। चीन ने इसे दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों को प्रभावित करने वाली संवेदनशील घटना बताया।
नेपाल सरकार हरकत में आई
चीनी दूतावास की मांग पर नेपाल सरकार ने तुरंत सक्रियता दिखाई। विदेश मंत्रालय ने गृह मंत्रालय को पत्र भेजा, जिसके बाद गृह मंत्रालय ने नेपाल पुलिस और मोरंग जिले के स्थानीय प्रशासन को घटना की जांच करने तथा दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया। पुलिस ने कॉलेज प्रशासन से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है और परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कॉलेज प्रशासन और स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह जानबूझकर नहीं किया गया। वे दावा करते हैं कि लाइब्रेरी में जगह बनाने के लिए पुरानी, क्षतिग्रस्त किताबें, पुराने कागजात और कचरा साफ किया जा रहा था। अनजाने में कुछ किताबें आग में जल गईं। उन्होंने इसे “रूटीन क्लीनिंग” बताया और जानबूझकर जलाने से इनकार किया।
नेपाल सरकार पर बढ़ा दबाव
हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद नेपाल सरकार पर दबाव बढ़ गया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नेपाल प्रशासन ने मीडिया को वीडियो हटाने के लिए भी कहा। घटना नेपाल-चीन संबंधों की नाजुकता को उजागर करती है। नेपाल चीन का महत्वपूर्ण पड़ोसी है और दोनों देश बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) समेत कई परियोजनाओं पर सहयोग करते हैं। यह घटना नेपाल में बढ़ते चीन-विरोधी भावनाओं या पुस्तकालय प्रबंधन की लापरवाही का संकेत मानी जा रही है। चीन ने इसे गंभीरता से लिया है।
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