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'पाकिस्तान की फौज ने अपने ही लोगों को मार डाला', बलूचिस्तान से लेकर खैबर पख्तूनख्वा तक भड़का गुस्सा

पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में सेना की कार्रवाइयों को लेकर बवाल मच गया है। बाजौर में सेना पर घरों और मस्जिदों पर गोलीबारी का आरोप है, जबकि बलूचिस्तान के केच में 4 लोगों की हत्या ने तनाव बढ़ा दिया है। जनता सड़कों पर उतरकर सेना के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है।

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Image Source : AP पाकिस्तान की सेना पर अपने ही लोगों की जान लेने का आरोप लगा है।

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के दो अलग-अलग इलाकों से लगातार आ रही खबरों ने सेना की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले में लोगों ने सेना पर घरों और मस्जिदों पर भारी हथियारों से गोलीबारी करने का आरोप लगाया है। वहीं बलूचिस्तान के केच जिले में 4 और लोग ‘अगवा कर मारने और लाश फेंकने’ के शिकार बने हैं। दोनों जगहों पर जनता सड़कों पर उतर आई और भारी विरोध प्रदर्शन किए।

'सेना ने समझौते का उल्लंघन किया'

खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर में स्थित खार तहसील के कोसर इलाके में बुधवार रात को सेना ने भारी हथियारों से गोलाबारी की। इसमें कई घर और मस्जिदें क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग दहशत में आ गए। गुस्साए लोगों ने गुरुवार को बाजौर-पेशावर हाईवे ब्लॉक कर दिया। लोरा बांदा, शागी, कोसर, जनत शाह, गालो कस और गूरो समेत दर्जनों गांवों के हजारों लोग सड़क पर बैठ गए। घंटों तक ट्रैफिक ठप रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि 14 अगस्त को हुए शांति समझौते में साफ लिखा था कि मामूंद तहसील में ऑपरेशन के दौरान आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाया जाएगा, लेकिन सेना ने समझौते का उल्लंघन किया।

'लोगों का सेना पर भरोसा खत्म हो जाएगा'

बाजौर अमन जरगा के अध्यक्ष साहिबजादा हारून रशीद ने कहा, 'यह समझौते की खुली अवहेलना है। अगर यही चलता रहा तो लोगों का सेना पर भरोसा खत्म हो जाएगा।' पीटीआई नेता खलीलुर रहमान, एएनपी नेता शाह नसीर खान और सैयद सादिक अकबर ने भी कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, 'यह हमारे घरों और मस्जिदों पर हमला है। इससे इलाके में बेचैनी बढ़ रही है। कारोबार ठप है, बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे।' डिप्टी कमिश्नर ने जरगा को भरोसा दिलाया कि आगे ऐसा नहीं होगा, तब जाकर हाईवे खोला गया। लेकिन लोगों में अभी भी डर बना हुआ है। उनका कहना है कि आतंकवाद के नाम पर अंधाधुंध गोलीबारी से न तो आतंकवाद खत्म हो रहा है और न ही आम जनता को राहत मिल रही।

केच में 4 और लोगों की हत्या से तनाव बढ़ा

दूसरी ओर बलूचिस्तान के केच जिले में 28 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच 4 और लोगों की हत्या ने तनाव बढ़ा दिया है। बलोच यकजहती कमेटी (बीवाईसी) ने इसे ‘राज्य प्रायोजित हत्या और लाश फेंकने’ की नीति करार दिया है। मारे गए लोग हैं:

  1. अब्दुल खालिक (पूर्व फ्रंटियर कोर सिपाही): 28 अक्टूबर को दश्त बाजार से अगवा किया गया, केच नदी में गोली लगी लाश मिली।  
  2. नजीबुल्लाह (31 वर्ष, स्कूल कर्मचारी): मीरी लिंक रोड पर अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या की।  
  3. बहाद बलोच (मजदूर): 1 नवंबर को तेल ले जाते वक्त लूटा और मारा गया, लाश मस्जिद में छोड़कर आत्महत्या का नाटक रचा गया।  
  4. अब्दुल रहमान (16 वर्ष, मेधावी छात्र): 2 नवंबर को तुर्बत में अपने पिता के सामने दुकान में गोली मार दी गई।

'यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा'

लोच यकजहती कमेटी ने कहा, 'यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा। राज्य की शह पर चल रही 'मौत की टोलियां' बलोच युवाओं को अगवा करती हैं, यातना देती हैं और लाशें फेंक देती हैं।' कमेटी ने मानवाधिकार संगठनों से अपील की है कि बलूचिस्तान में जारी जबरन गुमशुदगियां और हत्याओं की जांच कराई जाए।दोनों इलाकों से एक ही सवाल उठ रहा है कि सेना अपने ही लोगों को क्यों मार रही है? लोग कह रहे हैं कि आतंकवाद के नाम पर हो रही इन कार्रवाइयों से न आतंकवाद खत्म हो रहा है और न जनता को सुकून मिल रहा। (ANI)

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