इस्लामाबाद: पाकिस्तान में गरीबी और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यानी कि UNDP की ताजा रिपोर्ट में गंभीर तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की 38.3 फीसदी आबादी बहुआयामी गरीबी से जूझ रही है। इसका मतलब है कि इन लोगों को सिर्फ पैसों की कमी ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और रहने की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, UNDP के इस आकलन ने पाकिस्तान में विकास से जुड़ी लंबे समय से बनी कमियों को उजागर किया है।
बांग्लादेश के मुकाबले पाकिस्तान में ज्यादा गरीबी
UNDP के न्यूयॉर्क से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में 38.3 फीसदी आबादी बहुआयामी गरीबी का सामना कर रही है। वहीं, बांग्लादेश में यह आंकड़ा 14.9 फीसदी है। यानी दोनों देशों के बीच इस मामले में बड़ा अंतर है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी ध्यान देने की बात है कि दोनों देशों के आंकड़े अलग-अलग वर्षों में किए गए घरेलू सर्वेक्षणों पर आधारित हैं। इसलिए इन्हें एक ही समय की परिस्थितियों की सीधी तुलना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
गरीब आबादी को कई तरह की परेशानियां
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में बहुआयामी गरीबी से जूझ रहे लोगों के बीच अभाव की गंभीरता का स्तर 51.7 फीसदी है। इसका मतलब है कि गरीबी से प्रभावित लोगों को औसतन कई जरूरी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, पाकिस्तान की 12.9 फीसदी आबादी ऐसी है, जिसे बहुआयामी गरीबी के लिहाज से असुरक्षित श्रेणी में रखा गया है। ये लोग फिलहाल गंभीर गरीबी की स्थिति में न भी हों, तो भी उनकी परिस्थितियां ऐसी हैं कि वे आसानी से गरीबी के गहरे संकट में फंस सकते हैं।
सिर्फ कम कमाई से नहीं मापी जाती गरीबी
बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) गरीबी को केवल आमदनी या कमाई के आधार पर नहीं मापता। इसमें देखा जाता है कि लोगों को जीवन की जरूरी सुविधाएं कितनी मिल रही हैं और उन्हें किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसमें कुपोषण, बच्चों की मृत्यु दर, शिक्षा की कमी, साफ-सफाई की खराब व्यवस्था, सुरक्षित पेयजल का अभाव, खराब आवास और बिजली की कमी जैसे पहलुओं को शामिल किया जाता है। घर में जरूरी सामान और बुनियादी संपत्तियों की उपलब्धता भी इस आकलन का हिस्सा है। इस तरह यह सूचकांक गरीबी की कई परतों को सामने लाता है।
दुनिया में 15 साल बाद बढ़ी बहुआयामी गरीबी
रिपोर्ट में दुनिया भर में गरीबी को लेकर भी चिंता जताई गई है। पिछले 15 वर्षों में पहली बार बहुआयामी गरीबी से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़कर 1.2 अरब हो गई है। पिछले आकलन के मुकाबले यह संख्या 5.15 करोड़ ज्यादा है। यह बढ़ोतरी बताती है कि दुनिया के कई हिस्सों में लोगों को अब भी शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन की बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त रूप से नहीं मिल पा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, गरीबी की यह समस्या केवल कम आय तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन के कई अहम पहलुओं को प्रभावित करती है।
गरीबी की सबसे ज्यादा मार बच्चों पर
UNDP की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में बहुआयामी गरीबी से प्रभावित लोगों में आधे से ज्यादा बच्चे हैं। ऐसे बच्चों की संख्या करीब 61.7 करोड़ है। इन बच्चों को स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और रहने की बेहतर परिस्थितियों जैसी जरूरी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है। बचपन में इन सुविधाओं का अभाव उनके विकास और भविष्य के अवसरों पर भी असर डाल सकता है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गरीबी से प्रभावित कुल आबादी के 83 फीसदी लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं, जहां जरूरी सेवाओं तक पहुंचना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
दक्षिण एशिया में भी गरीबी की बड़ी चुनौती
रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया दुनिया में बहुआयामी गरीबी से जुड़ी समस्याओं का बड़ा हिस्सा झेल रहा है। वैश्विक स्तर पर पोषण, आवास और शिक्षा के वर्षों से जुड़े अभावों में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी कम से कम एक-तिहाई है। इसका मतलब है कि दुनिया भर में इन बुनियादी सुविधाओं की कमी से जुड़े कुल संकट में दक्षिण एशिया की भूमिका काफी बड़ी है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दक्षिण एशिया में करीब 15 करोड़ गरीब लोग ऐसे परिवारों में रहते हैं, जहां कम से कम एक बच्चा स्कूल नहीं जाता। यह स्थिति क्षेत्र में शिक्षा तक पहुंच की गंभीर चुनौती को दिखाती है। (ANI से इनपुट्स के साथ)
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